बॉलीवुड के शहंशाह कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन जी ऐसे ही शहंशाह नहीं बने बल्कि उन्होने कई ऐसे काम किए हैं जिसकी वजह से लोग उन्हे शहंशाह कहते हैं| सदी के महानायक, एंग्री मैन और बिग बी इत्यादि नामों से अमिताभ बच्चन जी को जाना जाता हैं| अमिताभ जी से मिलने की हर किसी की तमन्ना होती हैं लेकिन हर किसी की तमन्ना पूरी नहीं होती हैं| साल के पूरे दिन उनके घर से सामने फैंस की भीड़ जमा होती हैं ताकि लोग उनकी एक झलक पा सके| अमिताभ जी के बहुत सारे फैंस उनसे मिलना चाहते हैं लेकिन हर किसी की किस्मत इस बच्चे की तरह नहीं होती हैं जिसे अमिताभ जी खुद बुलाकर उससे मिले या बात करे| आइए जानते हैं इस पूरे वाकये के बारे में…

कहावत हैं की किस्मत सबसे बलवान होती है और ये कहावत इस बच्चे पर पूरी तरह से लागू होती हैं| जी हाँ इस बच्चे ने कभी सोचा भी नहीं होगा की उसकी मुलाक़ात ऐसे इंसान से होगी जिनसे मिलने के लिए लाखो लोग तरसते हैं लेकिन इस दिव्यांग बच्चे की किस्मत वाकई में बहुत तेज थी जिसकी वजह से सदी के महानायक ने उस बच्चे से मुलाक़ात और बातचीत की|

अमिताभ ने घर के अन्दर बुलवाया उस बच्चे को और की बातचीत

अमिताभ बच्चन जी तो एक बड़े कलाकार हैं ही इसके साथ ही उनका दिल भी बहुत बड़ा हैं| अमिताभ जी अक्सर लोगों की सहायता करते नजर आते हैं| यहीं इनके बड़े दिल होने का सबूत हैं| अमिताभ बच्चन जी हर किसी से बड़े ही प्यार से बात करते हैं और कभी भी किसी की सहायता करने सो वो हिचकते नहीं हैं|

ऐसा ही कुछ हुआ इस रविवार को उन्होने अपने घर के बाहर बैठे दिव्यांग बच्चे को अपने घर के अंदर बुलाया और उसे बिठाकर बड़े ही प्यार से बात की| इस बच्चे के साथ की उन्होने कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं| अमिताभ जी ने बताया कि उन्होंने उसे कुछ कपड़े देकर उसके घर तक भिजवाने का इंतजाम करवाया|

अमिताभ ने खुद लड़के से पुछा ‘तुम्हें क्या चाहिए?’


अमिताभ जी के घर के सामने यह दिव्यांग बच्चा बैठा था| इस दिव्यांग बच्चे को सिक्यूरिटी गार्ड ने अमिताभ जी के कहने पर उसे घर के अन्दर ले गया| घर के अंदर जाने पर अमिताभ जी इस बच्चे से मिले और उसकी बातें भी सुनीं| इस बच्चे से जो भी बातचीत अमिताभ जी ने की उसके बारे में उन्होंने अपने ब्लॉग पर लिखा|

अमिताभ जी ने अपने ब्लॉग पर लिखा

‘हर बार की तरह यह रविवार भी मेरे लिए खास था लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही खास था| भीड़ के बीच मेरा एक खास दिव्यांग फैन था| मैंने उसे अंदर बुलाया, जब वह अंदर आया तब उसके चेहरे की खुशी देखने लायक थी|’ फिर मैंने बातचीत के दौरान उससे पूछा कि क्या चाहिए? तो उसने टीशर्ट की ओर इशारा किया|

मैंने अपनी कई टीशर्ट उसे दे दी| उसके हाथ देखने में बहुत सख्त थे क्योंकि वो चलने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करता है| मैंने उसे वापस घर भिजवाने की भी व्यवस्था की|’ ऐसा वाकया हर किसी के साथ नहीं होता जैसा इस दिव्यांग बच्चे के साथ हुआ|

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