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अंधा कानून : 70 साल बाद साबित हुआ झूठ बोल रही थी लड़की…जज को हाथ जोड़कर मांगनी पड़ी माफी

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New Delhi : अमेरिका के फ्लोरिडा में 70 साल पहले एक लड़की के रे’प के मामले में सजा काटने वाले चार लोगों को मौ’त के बाद माफी दे दी गई है। 17 साल की लड़की ने इन चारों पर किडनैपिंग और रे’प का आरोप लगाया था। इसके बाद 3 को अपनी जान भी गंवानी पड़ गई और एक ने उम्रकैद की सजा काटी। पर 70 साल बाद मामला पलट गया। गवर्नर रॉन डीसैंटिस और उनकी कैबिनेट ने इनकी माफी पर मुहर लगाई। चारों के परिवारवालों से भी गलत केस चलाने के लिए माफी मांगी गई है।

17 साल की लड़की ने लगाए थे आरोप : 1949 में फ्लोरिडा के ग्रोवलैंड में सैम्युअल शेफर्ड, वॉल्टर इरविन, चार्ल्स ग्रीनली और अर्नेस्ट थॉमस नाम के अफ्रीकी मूल के चार अमेरिकी युवकों पर तब 17 साल की नोरमा पैजेट के रे’प का आरोप लगा था। पैजेट ने पुलिस को बताया था कि कार खराब होने के बाद चार अश्वेत लोगों ने पहले उसे किडनैप किया और फिर उसके साथ रे’प की वारदात को अंजाम दिया।

मीडिया में यह खबर फैलने के बाद उन्हें ‘ग्रोवलैंड फोर’ नाम दिया गया। पुलिस ने इस मामले में चारों अश्वेतों के अरेस्ट करने के बाद काउंटी जेल में यातनाएं दी थीं। इतना ही नहीं शेफर्ड नाम के एक आरोपी के घर में गुस्साई भीड़ ने आग तक लगा दी थी। रातभर मारपीट के बाद अर्नेस्ट थॉमस ने जेल के बाहर मौजूद दलदल में छिपकर भागने की कोशिश की।

1000 से ज्यादा बंदूकधारी पुलिसकर्मियों ने 30 घंटे तक उसकी तलाश की। शुक्रवार को फ्लोरिडा के सदन में पेश हुई रिपोर्ट में बताया गया कि थॉमस को केस चलाए जाने से पहले ही गोली मा’र दी गई थी। वहीं, इरविन और शेफर्ड को मौ’त की सजा सुनाई गई थी। 16 साल के ग्रीनली को नाबालिग होने की वजह से उम्रकैद की सजा दी गई थी।

बार-बार हुए हमले : तीनों आरोपियों ने जब सुप्रीम कोर्ट में अपील की तो उन पर फिर हमला हुआ। इसके बाद फ्लोरिडा के लेक काउंटी के शेरिफ विलिस मैकॉल उन्हें हथकड़ी लगाकर शहर के बाहर ले गए और गोली मार दी। इसमें शेफर्ड की मौके पर ही मौ’त हो गई और इरविन गंभीर रूप से घायल हुआ। हालांकि, विलिस ने गोली चलाने को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इरविन को मौ’त की सजा दी। कुछ समय बाद उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। 1968 में वो एक फ्यूनरल के लिए पैरोल पर जेल से बाहर आया तो लेक काउंटी लौटते वक्त कार में मृत पाया गया। दूसरी तरफ ग्रीनली को 1962 में जेल से रिहा कर दिया गया। उसकी 2012 में मौ’त हुई।

गवर्नर ने कहा- दोषी नहीं पीड़ित थे चारों : फ्लोरिडा के टैलाहासी में अधिकारियों की मीटिंग के दौरान रे’प का आरोप लगाने वाली नोरमा पैजेट (86) भी पेश हुईं। उन्होंने अफसरों से अपील करते हुए कहा कि दोषियों ने उनका रे’प किया था और इसलिए उन्हें माफ न किया जाए। हालांकि, डीसैंटिस गवर्नर बनने से पहले ही मामले को न्याय की असफलता बताकर चारों को माफी देने की बात कह चुके थे। डीसैंटिस ने हाल ही में कहा था कि चारों युवकों को उन अपराधों के लिए सजा दी गई जो उन्होंने किए ही नहीं। वो दोषी नहीं बल्कि असली पीड़ित थे। फ्लोरिडा के सदन ने भी चारों लोगों के परिवार से गलती के लिए माफी मांगी थी।

उपन्यास से सामने आई मामले की सच्चाई : गिलबर्ट किंग का उपन्यास ‘डेविल इन द ग्रोव’ इस मामले से जुड़े चारों लोगों पर ही आधारित है। 2013 में उन्हें इसके लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। किंग ने इस उपन्यास को शेफर्ड, इरविन, ग्रीनली और थॉमस का बचाव करने वाले वकील थर्गुड मार्शल (जो कि बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने) के जीवन पर लिखा था। इस किताब के रिलीज होने के बाद चारों पीड़ित आदमियों की कहानी पूरे फ्लोरिडा में चर्चित हुई।

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