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अनाथ बच्चों की मदद के लिए तीन बेटियों ने खोला फूड स्टाल, पेश कर रहीं इंसानियत की मिसाल

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आज हम आपको राजस्थान के कोटा शहर में रहने वाली तीन बेटियों के बारे में बताएंगे। ये बेटियां ऐसा काम कर रही हैं जिसे सुनकर बड़े भी यही सोचेंगे कि इंसानियत का धर्म निभाने की सच में कोई उम्र नहीं होती। कोटा की तीन बेटियों ने अनाथालय में रह रहे बच्चों के लिए कुछ करने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरुआत की ‘एपीएम’ ठेले की।

अब इससे होने वाली कमाई ये अनाथ बच्चों की खुशियों खरीदने के लिए करने वाली हैं। उसका हाथ जब मैंने अपने हाथों में लिया तो सोचा कि दुनिया को भी इसी की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए… लेकिन कैसे… आद्या तेरी उम्र तो महज 10 साल है… आखिर खुशियों के लिए तरस रहे अपनी ही उम्र के इस अनाथ बच्चे के लिए तू कर भी क्या सकती हैं… लेकिन मैं अकेली नहीं थी… मेरे साथ मुझसे तीन साल बड़ी बहन प्रिया और दो साल बड़ी उनकी दोस्त मान्या भी तो थीं… मैंने अपनी छटपटाहट जब उनसे साथ साझा की तो दो पल के लिए खामोशी पसर गई… लेकिन इसके बाद जो लफ्ज गूंजे उन्होंने हमारी दुनिया ही बदल दी…आओ चलो… कुछ खुशियां खरीद लाएं।

बावजूद इसके बड़ा सवाल था कि आखिर हम कर क्या सकते हैं? प्रिया दीदी बोली कि मैं घर पर चॉकलेट बना सकती हूं… पेपर वुड, टॉपिकानो और माजा के मल्टी फ्लेवर कॉकटेल बनाना आता है… मान्या दीदी ने आम पना, जलजीरा और रूहअफजा ड्रिंक्स की रेसिपी बता डाली… बस और क्या चाहिए था… सबसे छोटी होने के बाद भी मुझसे अच्छा एकाउंटेंट उन्हें कहां मिलता।

अरे… सामान खरीदने के लिए पैसे कहां से आएंगे… हम लोग एक साथ बोल पड़े। डरते-डरते मम्मी को अपना प्लान शेयर किया तो उन्होंने झट से ओपनिंग बैलेंस के तौर पर 1200 रुपए निकाल कर हमारे हाथ में रख दिए। साथ ही तलवंडी में रेस्टोरेंट के बाहर फूड स्टॉल लगाने का भी इंतजाम करा दिया।

15 हैंड पेंटेड पेम्फलेट बनाए, लेकिन इसके बाद पैसे खत्म हो गए तो सबसे अच्छे 9 पंपलेट्स को जेरॉक्स कराया। इन्हें लेकर अपने रिश्तेदारों-पड़ोसियों के घर और आसपास के हॉस्टल्स में गए… लोगों से मिले और उन्हें ‘खुशियां खरीदने’ के लिए इनवाइट किया। संडे को ‘एपीएम ठेला’ यानी आद्या, प्रिया और मान्या के फूड स्टॉल की शुरुआत कर डाली। सिर्फ तीन दिन में हमने 15 हजार रुपए की अर्निंग की।

बेटियों का कहना है जहां सभी अपनी-अपनी स्टॉल लगाकर चीजें बेचेंगे और जो फायदा होगा उसे अनाथालय में डॉनेट कर देंगे। कोटा की ये तीनों बेटियां महज चौथी, छठवीं और सातवीं क्लास में पढ़ती हैं।

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