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अभी-अभी : चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान-अभी जम्मू कश्मीर में नहीं होंगे विधानसभा चुनाव

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देश में 17वीं लोकसभा चुनने के लिए आम चुनावों का ऐलान हो गया है।  चुनाव आयोग ने विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। ये चुनाव 7  चरणों में होंगे पहले चरण में 11 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। 23 मई को चुनावों का परिणाम आएगा। 

चुनाव आयोग ने कहा अभी जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं होंगे।   कुल 7 चरणों में लोकसभा चुनाव होंगे। उन्होंने कहा कि पहले चरण की वोटिंग 11 अप्रैल, दूसरे चरण की 18 अप्रैल, तीसरे चरण की 23 अप्रैल, चौथे चरण की 29 अप्रैल, पांचवे चरण की 6 मई, छठे चरण की 12 मई और सातवें चरण की वोटिंग 19 मई को होगी।

इसके बाद 23 मई को लोकसभा चुनाव की मतगणना होगी।    मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील आरोड़ा ने कहा कि इस बार हमने मौसम और त्यौहारों का भी ध्यान रखा है। साथ ही बच्चों की परीक्षा का भी ध्यान रखा गया है। इस बार आठ करोड़ वोटर बढ़े हैं।

इस बार 90 करोड़ वोट डाले जाएंगे…EVM पर  उम्मीदवारों की तस्वीरहोगी। आचार संहिता लागू हो चुकी है। सभी संवेदनशील इलाकों में CRPF की तैनाती की जाएगी। आरोड़ा ने कहा है हम निष्पक्ष चुनाव परिणाम के लिए प्रतिबद्ध हैं। पोलिंग अधिकारियों की गाड़ियों में GPS लगाया जाएगा। उम्मीदवारों को अपना आ’पराधिक रिकॉर्ड देना होगा।

क्या होती है आचार संहिता : .राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं।

आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकते हैं, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन कर सकते हैं। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचे।

प्रत्याशी और राजनीतिक पार्टी को रैली, जुलूस निकालने, मीटिंग करने के लिए इजाजत पुलिस से लेनी होती है। जिन्हें चुनाव आयोग ने परमिशन ना दी हो वो मतदान केंद्र पर नहीं जा सकते हैं। राजनीतिक दलों की हरकत पर चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नजर रखते हैं। सरकारी गाड़ी या एयर क्राफ्ट का इस्तेमाल मंत्री नहीं कर सकते हैं। सरकारी बंगले का या सरकारी पैसे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के दौरान नहीं किया जा सकता है।

कोई भी घटक दल वोट पाने के लिए जाति या धर्म आधारित अपील नहीं की कर सकता, अगर ऐसा कोई करता है तो उसे दंडित किया जा सकता है। राजनीतिक पार्टियों को अपने कार्यकर्ताओं को आइडेंटी कार्ड देना होता है।

अगर नियमों का पालन नहीं किया तो : अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है, उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, उम्मीदवार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।

‘चुनाव आचार संहिता’ के नियम क्या हैं ?

आचार संहिता लागू होने के दौरान सत्ताधारी पार्टी या सरकार को किसी भी नए कल्याणकारी कार्यक्रम या योजनाएं लॉन्च करने की अनुमति नहीं होती। सत्ताधारी दल को अभियान उद्देश्यों के लिए “सीट ऑफ पावर” का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।चुनाव के दौरान यह माना जाता है कि कैंडिडेट्स श’राब वितरित करते हैं,

इसलिए कैंडिडेट्स द्वारा वोटर्स को श’राब का वितरण की मनाही होती है। चुनाव अभियान के लिए सड़क शो, रैलियों या अन्य प्रक्रियाओं के कारण कोई यातायात बाधा नहीं होनी चाहिए। मतदान केंद्रों में सभी प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों को चुनाव प्रक्रिया के लिए मतदान अधिकारियों के साथ सहयोग करने की आवश्यकता होती है, ताकि चुनाव प्रक्रिया अच्छी तरह से हो सके। चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों के आसपास चुनाव चिन्हों का कोई प्रदर्शन नहीं करना होता।

केवल चुनाव आयोग से वैध ‘गेट पास’ रखने वाले व्यक्ति को ही मतदान बूथ पर जाने की अनुमति होती है। हेलीपैड, मीटिंग ग्राउंड, बंगले, सरकारी गेस्ट हाउस इत्यादि जैसी सार्वजनिक जगहों पर कुछ उम्मीदवारों द्वारा एकाधिकार नहीं किया जाना चाहिए। इन स्थानों को प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के बीच समान रूप से उपयोग किया जाना चाहिए।

राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित होनी चाहिए, व्यक्तिगत नहीं। धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। वोट पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग ना हो। जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि। किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग ना करना। किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा ना उत्पन्न हो।राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करें, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएं आहत होती हों।

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