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आधीरात राजनेताओं के घर सप्लाई की जाती थीं कश्मीरी लड़कियां-CMअब्दुल्ला को देना पड़ा था इस्तीफा

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4 सितम्बर 2006 को जम्मू कश्मीर पुलिस ने एक हाईप्रोफाइल जिस्मफरोशी के धंधे के भंडाफोड़ का दावा किया था। उन्होंने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार कर लेने का दावा किया जो प्रदेश की टॉप राजनेताओं और नौकरशाहों को लड़कियां उपलब्ध कराती थी। पुलिस ने छापेमारी में करीब 12 लड़कियों को मौके से गिरफ्तार किया था। उनमें से एक नाबालिग थी।

इसी नाबालिग के एक एसएमएस ने प्रदेश की राजनीति में तहलका मचा दिया। इसी मामले की वजह से एक बार दिग्गज कांग्रेस नेता व जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राज्यपाल के पास इस्तीफा लेकर पहुंच गए थे। लेकिन केस  चला, मामला एकदम उलट गया। नेताओं के से’क्स स्कैंडल में आज कहानी जम्मू-कश्मीर उस दास्तान की जिसमें एक नाबालिग लड़की के एसएमएस से जम्मू कश्मीर के 2 मंत्री, 1 आईएस अधिकारी, 1 डीआईजी, 2 डीएसपी समेत 18 लोगों की गिरफ्तारियां हुईं। पूरे प्रदेश में कोहराम मच गया। सीएम को बेबस होकर इस्तीफा लिखना पड़ा। लेकिन सबूतों के अभाव में 10 साल तक चलती रही अदालत की सुनवाइयों में पकड़ी गई लड़कियां हवालात की हवा खाती रहीं और सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।

अगस्त 2006 में जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को एक अनजान नंबर से एसएमएस आया। उसमें खुद को नाबालिग बताते हुए नेताओं और नौकरशाहों के लिए चलने वाले देह व्यापार के ठिकाने का उल्लेख था और खुद को बचाने की अपील भी। आमतौर पर ऐसे मैसेजेस पर पुलिस ध्यान नहीं देती, लेकिन जाने किस मुहुर्त-घड़ी पुलिस का दिमाग फिर और जाकर ठिकाने पर छापा मार दिया। मौके से दर्जनों लड़कियां बरामद हो गईं। उनमें एक लड़की नाबालिग भी थी, उसने पुलिस को मैसेज देने की बात स्वीकार भी ली।

पुलिस के लिहाज से मामला पुख्ता हो गया। फटाफट सबीना नाम की महिला की गिरफ्तारी हुई, जिसे उसी नाबालिग के बयान के आधार पर रैकेट संचालिका बताया गया। इसके बाद परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में जानकारी यही निकली कि शबीना युवतियों को प्रदेश के मंत्रियों और आला-अधिकारियों को लड़कियां सप्लाई करती है। मामले में पुलिस ने कुल नौ लोगों पर चार्जशीट दाखिल कर अपना पल्ला झाड़ लिया और मामले को सीबीआई ने देखना शुरू किया।

सीबीआई ने जांच पड़ताल शुरू की। जानकारी के अनुसार मामले में 37 लोगों से पूछताछ की गई। कभी जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री रहे पिपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता मुज्जफर बेग ने दावा किया कि इस केस में उमर अब्दुल्ला सीरियल नंबर 102 हैं। पर सीबीआई ने उमर का नाम कहीं नहीं लिया। बात 2006-07 की है, तब केंद्र की कुर्सी पर कांग्रेस ही थी। लेकिन इस तरह के आरोपों से नाराज होकर मुखिया उमर अपना इस्तीफा लेकर राजभवन पहुंच गए। लेकिन उनके राज्यपाल ने इस्तीफा मंजूर नहीं की। फिर भी उमर ने फरमान जारी किया कि निर्दोष साबित होने तक वह कुर्सी से दूर ही रहेंगे।

शुरुआती राजनैतिक उथल-पुथल के बाद साल 2009 में केंद्र में मजबूती कांग्रेस सरकार आने और राज्य में मजबूत स्‍थ‌ित‌ि में होने के चलते मामला दब गया। अदालत की सुनवाइयों में नाबालिग का एसएमएस, मौके से बरामद किए सबूत नाकाफी पड़ने लगे। फिर किसी देह व्यापार के मामले में गिरफ्तार की गई महिला की गवाही पर कैसे प्रदेश के पूरे शासन को ध्वस्त किया जा सकता था। मामला सीबीआई से आगे चंडीगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया। और एक दिन ऐसा आया जब मुख्य गवाह ने ऐसा लिखा-

हिरासत में सीबीआई ने मुझे जबरदस्ती निर्दोष लोगों के खिलाफ आरोप लगाने का बाध्य किया था। ये सब लोग निर्दोष हैं। सीबीआई ने मुझे डरा धमका कर तब ट्रायल कोर्ट में गलत बयान दिलवाए थे। उन लोगों का डर ऐसा था कि कभी हिम्मत नहीं हुई उनके खिलाफ बोलूं।- जे एंड के से’क्स रैकेट की प्रमुख गवाह की याचिका

इस पर सीबीआई के वकील सुमित गोयल ने कहा कि ‘अभियुक्त और अभियोजन पक्ष अब एक-दूसरे के साथ मिल चुके हैं।’ लेकिन इन तमाम दलीलों का कोई असर नहीं हुआ।

29 सितंबर 2012 को अदालत ने मामले में आरोपी जम्मू-कश्मीर के पूर्व प्रमुख सचिव, विधायक, आईएएस अधिकारी रहे इकबाल खांडे, पूर्व मंत्री गुलाम अहमद मीर को बरी कर दिया गया। बाद में नाकाफी सबूतों के बिनाह पर देह व्यापार चलाने के ठेकेदार होने की आरोपी सबीना और उसके पति अब्दुल हामिद बुल्ला, व एक अन्य शख्स रमन मट्टू को दोषमुक्त कर दिया गया।

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