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इस गांव की है अनोखी कहानी…जमीन भारत की तो आसमान नेपाल का, हवा भारत की तो पानी नेपाल का

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देशों और महाद्वीपों की सरहदें यूं तो इंसानों ने तय कर दी हैं, लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जहां सरहदों ने अपनी जगह नफरत और बैर से नहीं बल्कि प्यार और भाईचारे से सींची हैं। ऐसा ही है धारचूला, जहां आपको भारत और नेपाल के साथ दोस्ताना रिश्तों की अनोखी झलक दिखेगी।

भीड़ से हटकर काम करने वाले बहुत कम ही लोग हैं इस दुनिया में। यहां तक की घूमने-फिरने के लिए लोग सिर्फ कुछ खास जगहों पर ही जाते हैं। अगर आप फोटो खिंचने के लिए ही यात्रा करते हैं तो आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी। लेकिन वो मजा नहीं आता।

धारचूला, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में बसा एक बेहद ख़ूबसूरत शहर है। हिमालय की गोद में बसा है धारचूला। स्थानीय लोगों के अनुसार, किसी जमाने में इस शहर से कई ट्रेड रूट्स गुजरते थे। हिमालय की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरा ये एक खूबसूरत सा कस्बा है।

धारचूला के निवासी, पहाड़ों के उस पार बसे नेपाल के दारचूला के निवासियों से काफी मिलते-जुलते हैं। समुद्रतल से 915 मीटर की ऊंचाई पर बसा ये कस्बा ख़ुद में प्रकृति के कई खजाने समेटे हुये है। धारचूला दो शब्दों से मिलकर बना है। धार यानि कि पहाड़ी और चूला यानि चूल्हा। ये घाटी चूल्हे जैसी दिखती है, इसीलिये इसका नाम धारचूला है।

वैसे तो यहां कभी भी जाना अच्छा होता है, पर बेस्ट टाइम है, मार्च से जून या सितंबर से दिसंबर के बीच। मौसम हमेशा सुहाना रहता है, गर्मियों में न तो ज्यादा गर्मी पड़ती है और सर्दियों में बर्फबारी भी होती है।

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