Connect with us

विशेष

इस वजह से शिमला और मसूरी जैसे हिल स्टेशनों से ज्यादा ठंडी है दिल्ली

Published

on

दिल्ली में रहने वाले लोग आमतौर पर चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए हिल स्टेशन (पहाड़ी इलाका) जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में दिल्ली का तापमान किसी हिल स्टेशन से कहीं ज्यादा कम दर्ज किया गया है। यहां इतनी ठंड पड़ रही है कि 119 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के कई हिस्सों में दिन और रात का तापमान मशहूर हिल स्टेशनों शिमला और मसूरी से ज्यादा ठंडा है। वीकेंड (सप्ताहांत) में इन दोनों पहाड़ी शहरों में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। दोनों दिन दिल्ली में स्थित मौसम विभाग के केंद्र में बहुत कम तापमान दर्ज किया गया। शनिवार को लगभग पूरी दिल्ली में अधिकतम तापमान 14 डिग्री से नीचे था। रविवार को कई मौसम केंद्रों- जफरपुर (11.6), मुंगेशपुर (11.9), पालम (13.5) सहित कई अन्य स्थानों पर 14 डिग्री से कम तापमान दर्ज किया गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसका मुख्य कारण मैदानी इलाकों में दिन के समय कोहरा छाया रहना है। जिसकी वजह से जमीन तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंच रही और इसके अलावा ठंड से बचने के लिए लोगों द्वारा जलाए गए अलाव ने धुंध का एक कवर बनाने का काम किया। दिल्ली में रात का तापमान दो डिग्री के आसपास रहा जो शनिवार को दोनों हिल स्टेशन से नीचे था। रविवार को कई स्थानों का तापमान शिमला के अधिकतम 2.8 के आसपास रहा। वहीं कई स्थान मसूरी से भी ज्यादा ठंडे रहे।

हिल स्टेशन से ज्यादा ठंड दिल्ली में पड़ रही है
उत्तरी मैदानी इलाकों में पिछले एक पखवाड़े से रोजाना सुबह कोहरे का असर दिखाई दे रहा है। जो दिन के समय एक ऊंचाई पर ऊपर उठ रहा है और कोहरे का या एक छोटे से क्लाउड (बादल) कवर का निर्माण कर रहा है। दिन के समय का यह कोहरा पाकिस्तान के पूर्वी क्षेत्रों से लेकर बिहार तक लगभग पूरे उत्तरी मैदानी इलाके को कवर कर रहा है। इस क्लाउड कवर के कारण सूरज की रोशनी जमीन तक नहीं पहुंच रही हैं। जिसके कारण दिन काफी ठिठुरन भरे होते हैं।

Image result for इस वजह से शिमला और मसूरी जैसे हिल स्टेशनों से ज्यादा ठंडी है दिल्ली

रविवार को यह क्लाउड कवर आंशिक रूप से छंटा जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर में सूरज की रोशनी देखने को मिली। इसी कारण शनिवार की तुलना में दिन के तापमान में एक या दो पायदान की वृद्धि हुई। मौसम विभाग के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव, ‘यह धुंध/क्लाउड कवर आमतौर पर जमीन से कुछ मीटर की ऊंचाई पर ही होते हैं। 1,600-2,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिल स्टेशनों को कवर करना मुश्किल होता है। वहीं पिछले कुछ दिनों से हिल स्टेशनों पर बारिश नहीं हुई है। जिसका मतलब है कि यदि शिमला और मसूरी में दिन के समय धुंध होती है तो दिन के समय यह ऊपर उठ जाता है और सूरज की रोशनी जमीन पर पड़ती है।’

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.