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एक फोन पर शिकायत का हल निकालने पहुंच जाते हैं IAS दीपक रावत..ऐसा DM कहीं नहीं देखा होगा

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 हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपक रावत अपने अच्छे कार्यों के लिए जाने जाते हैं। आए दिन सोशल मीडिया पर उनके अच्छे कामों की चर्चा होती रहती है। लोग जमकर उनकी प्रशंसा करते हैं। वो एक फोन पर शिकायत का हल निकालने वाले अधिकारी के तौर पर जाने जाते हैं।

उन्होंने अब तक अनगिनत छापे मारकर गलत हो रहे कार्याें को बंद करवाया है। यूट्यू पर उनके वीडियो हिट हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि उनको शिकायत मिलते ही वो उसपर तुरंत एक्शन लेते हैं। उसे टालते नहीं है।

आज हम उनका वो काम बताने जा रहे हैं जिसकी आप भी तरीफ करते नहीं थकेंगे। वो एक शहीद के घर गए थे। शहीद की मां के बेटे बनकर। दरअसल, देश की सेवा करते हुए मेजर शुभम ने 12 साल पहले अपनी जान कुर्बान कर दिया था। पुत्र की याद में पिता ने भी दुनिया छोड़कर चले गये। बस अब घर में अकेली शहीद मेजर शुभम की मां रहती हैं। देश में आने वाले बढ़े त्‍यौहार बस इस अकेली मां के लिए टीस बनकर रह गए हैं। हालांकि अकेले घर में रहते हुए शहीद मां को अब भारी पल नहीं लगते हैं क्‍योंकि उन्‍हें इसकी आदत हो गयी। लेकिन अचानक हरिद्वार डीएम दीपक रावत शहीद मेजर शुभम के घर पहुंचे।

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दरासल मेजर शुभम की मां का अपने बीते हुए खुशी के पल में खोई हुई थी। क्‍योंकि उनका जन्‍मदिन 19 तारीख को पड़ता था जिसे वो अपने बेटे के साथ मनाती थी। 12 साल बाद वैसी खुशीयां पर यादे बनकर रह गयी थी। क्‍योंकि बेटे के शहीद होने के बाद उनके घर में ना तो कोई त्योहार मना और न ही मां का जन्मदिन। लेकिन जब इसकी जानकारी हरिद्वार डीएम को हुई, तो वह कनखल में रह रही अकेली शहीद की मां का जन्‍मदिन मनाने पहुंच गए।

मिली जानकारी के मुताबिक बता दें कि शहीद के घर में किसी प्रकार की जन्‍मदिन को लेकर नहीं थी। साथ ही में न ही कोई ऐसी व्‍यवस्‍था की गयी थी कि यहां पर कोई आने वाला है। लेकिन अचानक डीएम पहुंचकर एक बेटे की तरह मां को जन्‍मदिन की शुभकामनाएं दिया। साथ की एक बेटी की तरह हर समस्‍या में साथ रहने की बात कही।

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वहीं इस पर डीएम दीपक रावत का कहना था कि पीएम और सीएम त्रिवेंद्र ने पहले ही सभी अधिकारियों से कहा है कि सभी शहीदों के घर जाकर उनका हालचाल जानते रहें। इसलिए जब उन्हें पता चला की आज शहीद मेजर शुभम की मां का आज जन्मदिन है, तो वे खुद को रोक नहीं पाए और उनसे मिलने चले आए। मेजर शुभम सिंह सेना में कंमाडर थे, जो 2005 में शहीद हो हुए। उन्‍होंने देश की सेवा करते हुए कई एकाउंटर किए थे।

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