Connect with us

विशेष

कश्मीरियों ने कहा- धारा-370 हटाओ मोदी जी, अलगावादी नहीं चाहते लेकिन कश्मीरी नागरिक तो चाहते हैं

Published

on

अनुच्छेद 370 कहा है? यह नजर आए तो बताना। इसने न मुझे हिंदुस्तान का होने दिया और न हिंदुस्तान को मेरा। यह मेरी पहचान नहीं है, यह मेरी पहचान की सियासत है। इसलिए बेहतर है कि इससे निजात मिल जाए..। यह उन आम कश्मीरियों के जज्बात हैं, जो सियासत, अलगाववाद और आतंकवाद के बीच खुद को पूरी तरह असहाय और असुरक्षित मानते हैं। तमाम शोर शराबे के बीच ये अपनी बात दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन एक अंजाने डर से चुप हैं।

भावनाओं का शोषण : कश्मीर विश्वविद्यालय में पॉलिटिकल साइंस के एक छात्र ने कहा, अनुच्छेद 370 सिर्फ एक सियासी नारे और कश्मीरियों की भावनाओं के शोषण के लिए रह गया है। केंद्र सरकार जब चाहे यहा अपनी इच्छानुसार केंद्रीय कानून लागू कर लेती है। बस यह वह सीधे तौर पर नहीं करती, वह उन्हीं राजनीतिक दलों से यह काम कराती है, जो अनुच्छेद 370 की हिफाजत का दम भरते हैं। बंगाल की बात करें तो वहा 370 नहीं होने के कारण क्या बंगालियों की पहचान खत्म हो गई है।

क्या ममता बनर्जी की मर्जी के बिना वहा अमित शाह की रैली हो सकती है, नहीं। फिर कश्मीरी सियासतदा क्यों चाहता है कि यह धारा बनी रहे। सिर्फ इसलिए कि वह इसके नाम पर नई दिल्ली को ब्लैकमेल करते हुए अपनी सियासत चलाए, जो कहीं न कहीं यहा अलगाववाद की पोषक बन जाती है। बेहतर है कि कश्मीरियों की पहचान व अधिकार सुनिश्चित करते हुए इसे हटाया जाए।

संशोधन क्यों नहीं : पेशे से अध्यापक शब्बीर कुमार की भी यही राय है। वे अनुच्छेद 370 को कहीं न कहीं कश्मीर समस्या का एक कारण मानते हैं। कहते हैं, सभी पक्षों के हितों को यकीनी बनाते हुए अगर इसे समाप्त किया जाता है तो शायद ही गिनती के कुछ लोगों के अलावा कोई और इसका विरोध करे। तो खत्म हो जाएगी दलों की सियासत :

कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ मुख्तार अहमद बाबा ने कहा कि जम्मू और लद्दाख में इसके (370) खिलाफ स्पष्ट आवाजें हैं। इसे कश्मीरियों की पहचान के साथ जोड़ दिया गया है। इसे हटाया जाता है तो कश्मीर में नेशनल काफ्रेंस, पीडीपी जैसे दलों की सियासत खत्म हो जाएगी। यहा एक वर्ग है जिसका पाकिस्तान की तरफ झुकाव है, लेकिन एक बड़ा वर्ग हिंदुस्तान की तरफ भी होगा।

इस मुद्दे पर बहस चाहता है कश्मीरी : आतंकियों का गढ़ कहलाने वाले त्राल निवासी अल्ताफ अहमद ठाकुर जोकि प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता भी हैं, ने कहा कि आज कश्मीरियों का एक बड़ा वर्ग इस मुद्दे पर बहस चाहता है। बहस होगी तो पता चलेगा कि इसने (370) दिया क्या और कश्मीरियों से लिया क्या? कब का निकल चुका 370 का जनाजा :

बड़गाम निवासी डॉ. अली ने कहा कि आप ही बताओ कि यहा 370 है कहा। इसका जनाजा तो कब का निकल चुका है। यह खाली ताबूत है। यह सारा सच आम कश्मीरी जानता है

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *