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कश्मीर में 75 हजार जवान तैनात, धारा-370 और 35A हटाए जाने की खबरें तेज

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 जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के नाते सरकार की ओर से एडवायजरी जारी होने और सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद से ही प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर व्हाट्सएप, फेसबुक से लेकर ट्वीटर और दूसरे सोशल मीडिया के मंचों पर भी सेना की तैनाती को लेकर अटकलों और अफवाहों का बाजार गर्म है।

लोग अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं। किसी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35 ए हटाए जाने को लेकर ये सब हो रहा है । दरअसल जम्मू-कश्मीर में 22 नवंबर 2018 से राज्यपाल शासन लगा हुआ है। ऐसे में अमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरे की खुफिया सूचना के बाद प्रदेश सरकार की ओर से शुक्रवार को अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई। राज्य प्रशासन की ओर से पाक आतंकी हमले के अंदेशे पर अमरनाथ यात्रियों से घाटी छोड़ने की अपील की गई है।

भारतीय सेना (फाइल फोटो)

प्रदेश के प्रधान सचिव (गृह विभाग) के सुरक्षा परामर्श में श्रद्धालुओं और पर्यटकों से ‘यात्रा की अवधि कम करने’ और ‘जल्द से जल्द लौटने’ को कहा गया है। बता दें, प्रदेश में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती पहले से ही जारी थी। अब तक कुल 380 कंपनियां भेजी जा चुकी हैं।

जम्मू-कश्मीर में 38 हजार अतिरिक्त जवानों को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 2018 से लेकर अब तक राज्य में तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक कर्मियों की संख्या बढ़कर 75,000 हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में सेना की तैनाती को आर्टिकल 35-A और 370 को खत्म करने से जोड़कर देखा जा रहा है, सोशल मीडिया पर इससे जुड़े संदेश एक-दूसरे को भेज रहे हैं।

अटकलों का बाजार गर्म, धारा 377 ए हटाने से लेकर अलग राज्य गठन की अफवाह

संविधान का अनुच्छेद 35ए और 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता है। सेना की तैनाती को लेकर पहली प्रतिक्रिया 35ए और 370 के हनन को लेकर आई। ऐसी चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के घोषणा पत्र में जम्मू कश्मीर अहम मुद्दे के तौर पर शामिल था।

Source Amarujala

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