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कागज़ का प्लेन उड़ाते थे गरीब बच्चे, हेडमास्टर ने अपने खर्चे पर असली प्लेन में बैठा दिया, लेकिन..

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आज भी भारत में कई लोग ऐसे हैं जिनके लिए आसमान में उड़ने का सपना बस सपना ही हैं. ये लोग जमीन पर खड़े होकर उड़ता प्लेन देखते हैं और उसी में खुश होकर दिल को समझा लेते हैं. इनके पास हवाई जहाज में सफ़र करने के पैसे नहीं होते हैं. खासकर बच्चों की बात करे तो उन्हें उड़ता प्लेन देखना बड़ा पसंद होता हैं. बचपन में कागज के प्लेन बनाकर उड़ाने वाले ये बच्चे भी असली प्लेन में उड़ने का सपना देखते हैं. ऐसे में इन मासूम और गरीब बच्चों का सपना पूरा कर एक हेडमास्टर बहुत तारीफें बटोर रहा हैं.

दरअसल इंदौर के देवास जिले के बिजेपुर के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले हेडमास्टर किशोर कनासे ने 19 स्टूडेंट्स को अपने खर्चे पर हवाई यात्रा करवा कर सबका दिल जित लिया हैं. हेडमास्टर किशोर ने अपनी सेविंग से जो भी पैसा बचाया था वो इन बच्चों को हवाई यात्रा कराने में खर्च कर डाला. इस काम में उनके पुरे 60 हजार रुपए खर्च हुए हैं. किशोर बताते हैं कि मैं काफी दिनों से एयर टिकट के दामों पर नजर जमाए हुए था. जब इनके दाम थोड़े सस्ते हुए तो मैंने एडवांस में ही बुकिंग कर ली. हेडमास्टर किशोर का कहना हैं कि इनमें से कुछ बच्चे तो ऐसे भी हैं जिन्होंने कभी ट्रेन में भी सफ़र नहीं किया था ऐसे में प्लेन का सफ़र कर उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.

इस सरकारी स्कूल के कक्षा छठीं, सातवीं और आठवीं में पढ़ने वाले छात्र जैसे ही पहली बार इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे तो उनके चेहरे के हावभाव देखने लायक थे. उनकी ख़ुशी सांतवे आसमान पर थी. यहाँ से इन बच्चों ने दिल्ली के लिए फ्लाईट पकड़ी और वहां दिल्ली दर्शन टूर पर गए. टाइम ऑफ़ इंडिया से बातचीत करते हुए तोहिद शेख नमाक स्टूडेंट ने कहा कि वो हमेशा जमीन से ही प्लेन देखा करता था. तब उसे ये प्लेन बहुत छोटा सा दिखता था लेकिन जब उसने इसे नजदीक से देखा तो पाया कि प्लेन बहुत बड़ा हैं.

हेडमास्टर किशोर बताते हैं कि एक बार वे अपने बच्चों के साथ आगरा के टूर से ट्रेन में बैठ लौट रहे थे. ऐसे में कुछ बच्चों ने जोश में आकर कहा कि हम अगली बार प्लेन से जाएंगे. बस यहीं से किशोर को आईडिया आया कि उन्हें बच्चों को प्लेन का सफ़र करवाना चाहिए. ये लोग इंदौर से दिल्ली प्लेन से गए थे लेकिन दो दिन बाद जब अपने गाँव लौटे तो ट्रेन में सफ़र करते हुए आए. बच्चों के अलावा इनके साथ दो टीचर नितिन गुप्ता और आशा तिलोदिया भी थे. दिलचस्प बात ये हैं कि ये दोनों शिक्षक भी पहली बार प्लेन में सफ़र कर रहे थे.

अब जिन भी स्टूडेंट्स ने प्लेन में सफर किया था उनके पास इस विमान की बहुत सारी बातें और यादें हैं. वे इसे अपने दुसरे दोस्तों और घर वालो के साथ ख़ुशी ख़ुशी बाँट रहे हैं. उधर हेडमास्टर किशोर कनासे की बहुत तारीफ़ हो रही है. आज के जमाने में उनके जैसे टीचर बहुत कम ही देखने को मिलते हैं. इस पुरे मामले पर आपके क्या विचार हैं हमें जरूर बताए.

 

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