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कैसा लगता है जब बेटा देश के लिए शहीद हो जाता है…खुद शहीद की मां ने बताया

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indian Army के कप्तान हनीफ उद्दीन केवल 25 वर्ष के थे जब 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान तुरतुक के सीमावर्ती शहर में दुश्मनों की कई गोलियों से वे देश के लिए शहीद हो गए। लेकिन उनकी माँ ने जो किया वह बहुत कम लोग जानते हैं। आईये जानें उस माँ की कहानी जिन्होंने देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाया।

हाल ही में एक सेना अधिकारी की पत्नी रचना बिष्ट ने हनीफ की माँ हेमा अज़ीज़ से मुलाकात की। और काफी देर तक कप्तान हनीफ के बारे में बात की। हनीफ की माँ ने अकेले ही इस जाबाज़ सिपाही को बड़ा किया था। क्योंकि जब हनीफ मात्र आठ वर्ष के थे तब उनके पिता का देहांत हो गया था। अकेले हेमा ने अपने बेटे को बड़ा किया और देश की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने की अनुमति भी दी। कारगिल युद्ध के दौरान जब हनीफ शहीद हुए तब सेना के जनरल वी.पी.मलिक ने हेमा को बताया कि वह हनीफ के मृत शरीर को वापस लाने में असमर्थ हैं। क्योंकि दुश्मन लगातार गोलीबारी कर रहे थे।

हेमा ने जनरल मलिक से कहा, अपने बेटे का मृत शरीर पाने के लिए मैं और एक सैनिक का जीवन खतरे में नहीं डालना चाहती। रचना बिष्ट ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से हेमा की बातचीत को साझा किया और इस दौरान वह समझ गयीं कि उन्होंने एक माँ होने के नाते इतना साहस कहाँ से जुटाया। एक शास्त्रीय गायिका हेमा अज़ीज़ ने हनीफ को एक एकल अभिभावक के रूप में बड़ा किया। क्योंकि जब हनीफ मात्र 8 वर्ष के थे तब उनके पति की मृत्यु हो गयी थी। हनीफ के शहीद होने के बाद उन्होंने सरकार की तरफ से मिल रहे पेट्रोल पंप को लेने से मना कर दिया था। हनीफ के स्कूली सफर के दौरान भी हेमा ने उसके लिए मुफ्त स्कूली वर्दी लेने से इंकार कर दिया था। हेमा ने हनीफ से कहा कि वे अपने शिक्षक को बताएं कि मेरी माँ पर्याप्त कमाई करती हैं और मेरे स्कूल को यूनिफार्म का खर्च उठाने में सक्षम हैं। वे आगे कहती हैं, हनीफ एक सैनिक था और वह देश के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा था। और हेमा नहीं चाहती थीं कि वह अपनी जान बचाने के लिए वापस आ जाए।

कप्तान हनीफ तुरतुक में दुश्मनों की गोलियों से शहीद हो गए थे और करीब 40 दिनों तक उनके मृत देह को वापिस नहीं लाया जा सका था। जब सेना के जनरल ने हेमा से कहा कि, हम हनीफ के मृत देह को वापस नहीं ला सकते क्योंकि दुश्मन लगातार गोलीबारी कर रही है। तब हेमा ने उनसे कहा, वह नहीं चाहतीं कि उनके बेटे का मृत शरीर पाने के लिए एक और सैनिक अपनी जान जोखिम में डाले।

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