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चाय बेचकर गरीब बच्चों के लिए खोला स्कूल, अब मिलने जा रहा है पद्मश्री

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पिछले 18 सालों से एक चायवाला मज़दूरों, रिक्शा चालकों जैसे ग़रीब बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी आधी कमाई ख़र्च करता आ रहा है. इस नेक दिल इंसान का नाम है देवरापल्ली प्रकाश राव, जो कटक में रहते हैं. उनके लिए रविवार का दिन उनके लिए बहुत ही ख़ास रहा. उन्हें फ़ोन पर पता चला कि इस साल जिन लोगों को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा, उसमें प्रकाश राव का नाम भी शामिल है.

Source: ANI/NDTV

प्रकाश राव पिछले 18 सालों से कटक के बक्शी बाज़ार में एक स्कूल चला रहे हैं. इसमें आप-पास की झुग्गियों(स्लम) से करीब 70 बच्चें तालीम लेने आते हैं. बच्चों के मां-बाप इतने ग़रीब हैं कि वो उन्हें पढ़ने की बजाए, काम पर जाने को कहते हैं, ताकी उनकी दो वक़्त की रोटी का बंदोबस्त हो सके.

Source: India Today

इसलिए प्रकाश राव को इन बच्चों को स्कूल लाने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी. उन्होंने हर बच्चे के घर जाकर उनके माता-पिता को समझाया. इसके बाद भी जब कुछ लोग नहीं माने, तब उन्होंने कहा कि दिन का खाना भी वो उन्हें स्कूल में खिलाएंगे. तब जाकर लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हुए.

Source: Telugu News – Samayam

Asha O Ashwasana नाम के इस स्कूल को राव ने साल 2000 में शुरू किया था. चाय बेचने के बाद जो आमदनी होती है, उसका आधा हिस्सा वो स्कूल पर ख़र्च कर देतें हैं. वो बच्चों को किताबों के साथ ही पहनने के लिए यूनिफ़ॉर्म भी देते हैं. उनके पिता भी एक चाय की दुकान चलाते थे.

Source: News Odisha

उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसके चलते राव को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. दूसरे बच्चों के साथ ऐसा न हो इसके लिए उन्होंने एक संकल्प लिया. प्रकाश राव ने तय किया कि वो ग़रीब बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और उनकी हर संभव मदद करेंगे. तब से लेकर आज तक वो अपने संकल्प को निभाते चले आ रहे हैं.

Source: The Financial Express

पिछले साल पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के 44वें एपिसोड में प्रकाश राव का ज़िक्र किया था. पीएम ने इन्हें ग़रीब बच्चों का मसीहा बताते हुए उनसे लोगों को प्रेरणा लेने को कहा.

पदमश्री पाने वाले इस चायवाले से हमें यही सीख मिलती है कि अपने काम को पूरी निष्ठा के साथ करते जाइए, दुनिया एक दिन आपको ज़रूर पहचानेगी. देश को ऐसे ही जुझारू लोगों की ज़रूरत है.

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