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ट्रेन में मिले अंजान लड़का-लड़की और फिर हो गया प्यार…हर किसी को पढ़नी चाहिए इनकी कहानी

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आज हम आपको एक ऐसी कहानी बता रहे हैं जिसमें प्यार है..वादा है और दिल में वो मीठा सा दर्द है जो प्यार करने वालों का पता होगा कि कैसा होता है। लड़की ट्रेन में थी लड़का चोरी चोरी उसे देख रहा था। ये कहानी है अविनाश की।जो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की।

अविनाश कहते हैं… मैं लास्ट ईयर जुलाई में एक एग्जाम देने Delhi से जयपुर आ रहा था कि एक लड़की ट्रैन के रिजर्वेशन के डिब्बे में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर बैठी थी और उसके चेहरे से पता चल रहा था कि उसके दिल मे थोड़ी सी घबराहट है कि टीटी ने आकर पकड़ लिया तो। कुछ देर तक तो पीछे पलट पलट कर टीटी के आने का इन्तेजार करती रही, सायद सोच रही थी कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी। देखकर यही लग रहा था कि जनरल डिब्बे में चढ़ नही पायी इसलिए इसमें आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लंबा सफर भी नही करना होगा उसको।

सामान के नाम पर उसकी गोद मे रखा एक छोटा सा बैग दिख रहा था। मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा उसको पीछे से देखने की की शायद चेहरा सही से दिख पाऊं, लेकिन हर बार असफल ही रहा। फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिकाकर सो गई। और मैं भी बापिस से अपने फ़ोन में मूवी देखने मे लग गया,,,लगभग एक घंटे बाद टीटी आया और उसको हिलाकर उठाया।

टीटी बोला कि कहा जाना है बेटा?? तो वो बोली कि दौसा तक जाना है। तो टीटी बोला कि टिकट है तो वो बोली कि नही है अंकल,,मेरे पास तो जनरल का टिकट है लेकिन वहां चढ़ नही पायी इसलिए इसमें बैठ गयी। तो टीटी बोला कि ठीक है तो 300 रुपये निकालो,,पेनाल्टी लगेगी। वो तो जैसे शोकड हो गयी और बोली कि ओह्ह! अंकल, मेरे पास तो 100 रुपये ही है,,टीटी बोला की गलत बात है ये तो,पेनाल्टी तो भरनी ही पड़ेगी।तो वो बोली कि सॉरी अंकल,,,मैं अगले स्टेशन पर जेनेरल मे चली जाउंगी,,,मेरे पास सच में पैसे नही नही है,,,,कुछ परेशानी आ गयी, इसलिए जल्दबाजी में घर से निकल आयी,,,ओर ज्यादा पैसे रखना भुल गयी,,,,बोलते बोलते वो लड़की रोने लगी और फिर टीटी ने उसको माफ किया और 100रुपये में उसे दौसा तक उस डिब्बे में बैठने की परमिशन देदी।

टीटी के जाते ही उसने अपने आंसूं पोछे ओर इधर उधर देखा कि कही कोई उसको देखकर हस तो नही रहा। ओर फिर 2-4 मिनट बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और उससे बोली कि मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नही बचे है,,,रेवाड़ी स्टेशन पर कुछ भी जुगाड़ करके मुझ तक पैसे भिजवाओ, वार्ना मैं गांव नही पहुच सकूँगी। मेरे मन मे कुछ अजीब सी फीलिंग्स हो रही थी, ना जाने क्यों,उसकी मासूमियत को देखकर उसकी तरफ खीचाव सा महसूस कर रहा था।

दिल कर रहा था कि उसको पैसे दे दूं ओर उसको बोलू की आप परेशान मत होइए,,ओर आप रोना बंद कर दो। लेकिन एक अजनबी लड़की के लिए इस तरहा की बात सोचना भी सही नही था। पर जब भी उसको देखता तो लगता कि सायद इसने सुबह से कुछ खाया पीया भी नही है, ओर अब तो उसके पास पैसे भी नही है। कुछ देर बाद मैंने ही सोचा कि इसकी इनडाइरेक्ट तरीके से मदद करता हु, ताकि इसको ये ना लगे कि मैं कोई चांस मार रहा हु या फ़्लर्ट कर रहा हूं। फिर मैंने एक पेपर पर नोट लिखा,” बहुत देर से आपको परेशान होते हुए देख रहा हूं,,जानता हु की एक अजनबी लड़के का आपको इस तरह लेटर भेजना,,आपको गलत ही लगेगा।

पर आपको इस तरह परेशान देखकर मुझे बेचैनी सी होने लगी, इसलिए ये 500 रुपये दे रहा हूं, तुम्हे कोई अहसान ना लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिख रहा हूं। जब भी आपको सही लगे तो मेरे एड्रेस पर पैसे वापिस भेज सकती हो,,वैसे मैं नही चाहूंगा कि तुम वापिस करो,,अगर किसी को कभी कोई मदद चाइये हो तो उसकी मदद कर देना और समझ लेना कि आपने पैसे रिटर्न्स कर दिए। एक अजनबी हमसफर।

ओर फिर एक चाय वाले से बोला कि ये लेटर ओर ये 500 रुपये उसको दे दो और मेरा नाम मत बताना की पैसे मैने भेजे है। लेटर ओर पैसे मिलते ही उसने 3-4 बार इधर-उधर देखा कि कोंन है जिसने हेल्प की है शायद उसको लगा हो कि हेल्प करने वाला उसको देख रहा होगा तो वो उसको पहचान लेगी। पर मैं तो लेटर भेजते ही फिर से फ़ोन में लग गया। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी तरफ देखा तो वो खुश थी,,सायद थोड़ी रिलीफ महसूस करने लगी थी वो। उसके चेहरे की मुस्कुराहट से लग रहा था कि काफी टाइम बाद वो इस अनजान हेल्प के कारण मुस्कुराई हो। उसकी वो मुस्कुराहट ओर आखो में जो चमक आ गयी थी।

मैं बस उसको चोरी चोरी देखता जा रहा था। ओर फिर दौसा आ गया और वो उतर गयी। मैं गेट की तरफ आगे बढ़ने लगा की उसको आखिरी बार फिर से देख सकूं तो देखा कि उसकी सीट पर भी एक लेटर था। मैन वो लेटर उठाया तो उसमें लिखा था कि thank you,, thank you so much मेरे अजनबी हमसफर।

आपका ये अहसान मैं जिंदगी भर नही भूलूंगी,,,आज मेरे पापाजी का निधन हो गया,,,घर मे मेरे अलावा और कोई नही है इसलिए जल्दबाजी में घर जा रही हूं। उनकी बीमारी के कारण उनकी मौ’त हुई है इसलिए उनको ज्यादा देर घर मे नही रखा जा सकता,, आज आपके इन पैसों से मैं अपने पिताजी को शमशान जाने से पहले देख सकूँगी। आज से मैं आपकी कर्जदार हूं। आप भले ही भूल जाओगे की किसी की मदद की थी,,पर मैं कभी नही भूल सकूँगी की किसी अजनबी ने मेरे लिए इतना कुछ किया था। मैं आपके पैसे जल्द से जल्द लौटा दूंगी।

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मैं तो सच मे भूल ही गया था पर अभी लास्ट वीक पूरे one year बाद उसका लेटर आया। उसमे लिखा था कि,,,,मैं आपका कर्ज अदा करना चाहती हूं, लेकिन लेटर के जरिये नही, बल्कि मिलकर। नीचे मिलने की जगह का एड्रेस लिखा था और आखिर में लिखा था,,,तुम्हारी अजनबी हमसफर। फिर दोनों मिले और दोनों पति-पत्नी हैं। तो दोस्तों एक अच्छी आदत की वजह से अविनाश को उसकी जीवन संगनी मिल गई। मदद करना कोई गुनाह नहीं अच्छी आदत है इसलिए आप भी किसी जरूरत मंद की मदद जरूर करें।

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