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तिहाड़ जेल के 3400 कैदी फरार, तलाश में जुटी पुलिस

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नई दिल्ली। तिहाड़ जेल से जमानत और पैरोल पर छोड़े गए 3400 से ज्यादा कैदी लापता हैं। ये उन कैदियों की तादाद है जिन्होंने पैरोल या जमानत की अवधि खत्म होने के बाद भी जेल में सरेंडर नहीं किया। तिहाड़ जेल की तरफ से ऐसे कैदियों की सूची दिल्ली पुलिस को सौंपी गई है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण को बढ़ता देख इन कैदियों को जमानत और पैरोल पर छोड़ा गया था ताकि जेल में कोरोना संक्रमण फैलने पर कैदियों को बचाया जा सके। लेकिन पैरोल या जमानत की तय अवधि पूरी होने के बाद भी 3400 कैदी वापस नहीं लौटे हैं।

जानकारी के अनुसार पिछले साल जब कोरोना संक्रमण के मामले तिहाड़ जेल में आने लगे तो जेल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो गया। जिसके बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार एवं अदालत से निवेदन कर 6 हजार से ज्यादा कैदियों को जमानत और पैरोल पर छोड़ा था। इनमें सजा पा चुके कैदियों के साथ ही बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदी भी शामिल थे।

इनमें ऐसे कैदी भी शामिल थे जिन्हें एचआईवी, टीबी, कैंसर, किडनी आदि गंभीर बीमारियां थी। इन्हें एक तय अवधि के लिए पैरोल और जमानत मिली थी. कुछ कैदियों के लिए इस अवधि को बाद में बढ़ाया भी गया था, लेकिन यह अवधि अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है और अभी तक 3468 कैदियों ने जेल में सरेंडर नहीं किया है।

जेल प्रशासन की तरफ से पुलिस को बताया गया है कि उन्होंने 1184 सजा पा काट रहे कैदियों को तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेल से छोड़ा था। शुरुआत में उन्हें आठ सप्ताह के लिए छोड़ा गया था और बाद में इस अवधि को बढ़ाया गया। बीते 6 मार्च तक इन कैदियों को सरेंडर करना था लेकिन इनमें से 112 कैदी वापस नहीं लौटे हैं।  इसी तरह 5556 विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था।  इन सभी को मार्च के आखरी हफ्ते तक आत्मसमर्पण करना था।

इनमें से केवल 2200 कैदियों ने ही वापस जेल आकर सरेंडर किया है। जबकि बाकी करीब 3300 कैदी वापस नहीं लौटे। इन सभी फरार कैदियों की जानकारी दिल्ली पुलिस को भेजी गई है। अब दिल्ली पुलिस के सामने इन कैदियों के बारे में जानकारी जुटाना और गिरफ्तार करके वापस जेल भेजना बड़ी चुनौती है, लेकिन पुलिस ने जानकारी मिलते हैं बड़े पैमाने पर भगौड़े कैदियों की तलाश शुरू कर दी है।

जेल प्रशासन का कहना है कि इन तमाम कैदियों की इमरजेंसी परोल आगे नहीं बढ़ाई गई। सभी को इनकी इमरजेंसी परोल खत्म होने के दिन के हिसाब से हर सूरत में 10 अप्रैल तक जेल में सरेंडर करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन करीब 3500 हजार कैदियों ने तय समय तक सरेंडर नहीं किया।

हो सकता है कि इनमें से कुछ मामलों में सजा खत्म हो गई हो, लेकिन किसी अन्य इमरजेंसी कारण के इनमें से कुछ जेल में सरेंडर नहीं कर पाए हों या फिर संबंधित अदालतों में इनमें से कुछ ने अपनी इमरजेंसी जमानत बढ़ाने की अर्जी दाखिल की हो। जेल अधिकारियों का हालांकि कहना है कि इन तमाम हालात में भी इन कैदियों को अपनी परोल खत्म होने के अंतिम दिन जेल में सरेंडर करना चाहिए था।

अगर इन्होंने सरेंडर नहीं भी करना था तो जेल प्रशासन को सरेंडर न करने के पीछे की वाजिब वजह बताई जानी चाहिए थी, ताकि उसी हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाती। अब चूंकि इतनी बड़ी संख्या में इन कैदियों ने वजह बताए बिना सरेंडर नहीं किया तो जेल नियमों के हिसाब से इन्हें फरार ही माना जाएगा। संबंधित कोर्ट से इन्हें भगोड़ा घोषित कराने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।

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