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टैकनोलजी

दुनिया ने देखा भारत के मेक इन इंडिया का दम…पहली बार विदेश में दौड़ी भारत में बनी ट्रेन

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जिस ICF ने देश को सबसे तेज गति वाली Train-18 दिया, उसी की बनाई ट्रेन S-13 आज श्रीलंका में दौर रही है। S-13 ट्रेन का विकास मेक इन इंडिया के तहत अपने देश में किया गया और श्रीलंका एक्सपोर्ट किया गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। ट्रेन के आगे भारत और श्रीलंका का झंडा फहरा रहा है। रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

पीयूष गोयल ने ट्वीट में लिखा है कि मेक इन इंडिया मेड ऑर वर्ल्ड। भारत की रेलवे कोच फैक्ट्री आईसीएफ चेन्नई में बनी ट्रेन अब श्रीलंका में दौड़ रही है। बता दें कि ये रेलगाड़ी बहुत आराम से 200 किलोमीटर की गति पर चलाई जा सकती है।

यूरोप व पश्चिमी देशों में मौजूद आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था के तहत भी इस रेलगाड़ी को चलाया जा सकता है। इसकी मांग विदेशों में बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि जिस कीमत पर इस ट्रेन को बनाया गया है वह बेहद आकर्षक है। दुनिया में कहीं भी इस कीमत पर इस तरह की ट्रेन नहीं बनाई जा रही है।

रेलवे की चेन्नई स्थित ICF कोच फैक्ट्री मलेशिया, फिलिपींस, ताईवान, वियतनाम, बांगलादेश, तंजानिया, मोजैम्बिक, अंगोला, नाइजीरिया, युगांडा व कुछ अन्य देशों के लिए रेलगाड़ियों के डिब्बे या उनके पुर्जे बना कर निर्यात कर रही है। वहीं, श्रीलंका को खास तरह की डीएमयू ट्रेन दी गई है।

आज हम आपको वीरता की एक ऐसी स्टोरी बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप का भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। यह घटना साल 2010 के सितंबर महीने की है, एक शाम गोरखा राइफल्स का हवलदार दीपप्रसाद पुन अकेले ही अफगानिस्तान के हेल्मंड प्रांत में मौजूद एक आर्मी चौकी की रखवाली कर रहा था। तभी उसे ज्यादा संख्या में आए तालिबानी लड़ाकों ने चारो तरफ से घेर लिया तथा गोलियों तथा रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड से आसमान को धुआं-धुआं कर दिया।

दीप प्रसाद पुन ने सोचा कि अब मरना तो है ही, इसलिए क्यों ना कुछ लोगों को मारकर ही मरूं। फिर क्या था गोरखा राइफल्स के इस जवान ने ट्राईपॉड पर मशीनगन लगाई और तालिबानियों पर गोलियों की बौछार कर दी। दीप प्रसाद ने हमला इतनी तेजी से किया था कि तालिबानियों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

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