fbpx
Connect with us

विशेष

पकड़ा गया एक और भ्रष्ट सरकारी अधिकारी, 3 अटैचियों में भरे थे नोट, गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मशीन

Published

on

नारकोटिक्स के डिप्टी कमिश्नर डॉ.सहीराम और दलाल कमलेश की गिरफ्तारी के बाद जयपुर की संपत्तियों के बारे में ACB को पता चला। इसके बाद एसीबी एडीजी सौरभ श्रीवास्तव के निर्देशन में तीन टीमें बनाई गई। पहली टीम शंकर विहार जयपुर स्थित आवास पर भेजी। दूसरी टीम सीतापुरा स्थित लक्ष्मी फीलिंग स्टेशन पर भेजी। तीसरी टीम सीतापुरा स्थित मैरिज गार्डन पर भेजी। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, आरोपी के शंकर विहार स्थित आवास की तलाशी में पहली मंजिल पर अलमारी के लॉक को तोड़कर जांच की तो तीन अटैचियों में काफी मात्रा में कपड़े व पॉलिथिन की थैलियों में नोट भरे हुए मिले।

जिनको गिनने के लिए नोट गिनने की मशीन मंगवाई गई। तीनों अटैचियों में दो करोड 26 लाख 98 हजार 8 सौ रुपए मिले। 6 लाख 26 हजार रूपए के आभूषण मिले। एसीबी की ओर से सर्च कार्रवाई में सहीराम व परिजनों के नाम से विभिन्न बैंकों में 15 खातों की जानकारी होना सामने आया है। साथ ही कुछ लॉकर मिले है। इन बैंक खातों व लॉकर को एसीबी सोमवार को सीज करवाएगी। इसके बाद बैंकों व लॉकरों की तलाशी ली जाएगी। एसीबी को शक है कि बैंक खातों में लाखों रुपए जमा है।

कमिश्नर ने मांगी रिपोर्ट, होगी विभागीय कार्रवाई : नारकोटिक्स डिपार्टमेंट की पूरे देश में सिर्फ तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में यूनिट है। नारकोटिक्स के कमिश्नर ग्वालियर में बैठते हैं। राजस्थान के कोटा चित्तौड़ आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है। यही वजह है कि नेशनल नारकोटिक्स ब्यूरो ने अपने अधिकारी तैनात कर रखे हैं। सहीराम की एसीबी की टीम ने तलाशी ली तो एक बारगी टीम भी नोटों की गड्डियां देखकर अचंभित रह गई। टीम ने जिस आलमारी में हाथ रखा उसी अलमारी में कहीं नोट तो कहीं लाखों रुपए कीमत के प्लाटों के पट्टे मिले। घरवालों ने एसीबी का विरोध किया तो टीम ने अलमारी तोड़कर नोट निकाले।

रिश्वत का खेल… मुखिया बनाने के लिए ऐसे चलता है : नारोटिक्स विभाग और अफीम किसानों के बीच की मुख्य कड़ी मुखिया होता है। इसका काम किसानों की फसल का मेजरमेंट, अफीम की तुलाई और तमाम कागजातों की खानापूर्ति करना होता है। कनेरा गांव में वर्तमान में अफीम की खेती के 400 पट्टे हैं। इन पट्टों के ऊपर गांव में 8 मुखिया हैं। मुखिया उसे बनाया जाता है, जिसके खेत की अफीम की गुणवत्ता (मॉरफीन) सबसे ज्यादा होती है। कमलेश के खेत की गुणवत्ता करीब 6.2 प्रतिशत थी, जो गांव के उस इलाके में सबसे ज्यादा थी। फिर भी मुखिया दूसरे को बना दिया।

एसीबी से कहा- रिश्वत नहीं ली, दलाल ने रुपए बताए ; सहीराम मीणा को रिश्वत देने वाले कमलेश के फोन को दो माह से सर्विलांस पर ले रख रखा था। दलाल को सहीराम ने पहले 25 जनवरी की शाम को रिश्वत लेकर अपने सरकारी बंगले पर बुलाया। इसके बाद अगले दिन सुबह दस बजे बुलाया। 12 बजे सहीराम मीणा के घर जाकर दलाल कमलेश ने ज्यों ही रुपए दिए तो पहले से बैठी एसीबी ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। पकड़े जाने के बाद सहीराम ने एसीबी से कहा कि उसने रिश्वत नहीं ली। दलाल कमलेश से एसीबी ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने रुपए दिखा दिए।

लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहता है…. भाजपा नेता का करीबी सहीराम : सहीराम मीणा मूलरूप से ग्राम जीबली, थाना वजीरपुर, जिला सवाईमाधोपुर का रहने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार मीणा लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। मीणा ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों से दावेदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

चुनाव लड़ने के लिए मीणा सेवा से जल्द रिटायरमेंट लेने की तैयारी में थे। एसीबी की कार्रवाई के दौरान भी कुछ दस्तावेज ऐसे मिले हैं, जो मीणा के चुनाव लड़ने की तैयारी को पुष्टि करते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए एक दिग्गज नेता से भी सहीराम मीणा के मजबूत करीबी संबंध बताए जा रहे हैं।

मीणा का परिवार बड़े प्रशासनिक और राजनैतिक रसूखात रखता है। सहीराम मीणा की एक बेटी उत्तराखंड के एक जिले में कलेक्टर है। मीणा के साले रामविलास ने लालसोट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। सहीराम के ट्रैप होने के बाद रामविलास कोटा में दिनभर उसकी खातिरदारी में लगे रहे। मीणा को एसीबी ने रविवार को अपने ऑफिस में हिरासत में रखा था, उसी दौरान रामविलास दिनभर ऑफिस के बाहर अपनी गाड़ी से आते-जाते रहे।

ऐसे पकड़ा गया…सूचना के बाद 2 माह सर्विलांस पर रहा फोन

जिला अफीम अधिकारी चित्तौड़गढ़ ने कमलेश के पिता और अफीम काश्तकार नंदलाल धाकड़ को अफीम की खेती के लिए पट्टे का मुखिया नहीं बनाकर किसी अन्य किसान को बनाया गया था। कमलेश ने पिता को मुखिया न बनाने पर जिला अफीम अधिकारी चित्तौड़गढ़ की शिकायत सहीराम मीणा से की। डॉ. सहीराम ने शिकायत पर कार्रवाई करने तथा पूर्व पट्टे के मुखिया को हटाने व कमलेश के पिता नंदलाल धाकड़ को मुखिया बनाने की एवज में पांच लाख रुपए की रिश्वत मांगी।

धाकड़ और सहीराम की बातचीत में 26 जनवरी यानी शनिवार को सरकारी बंगले पर रिश्वत की रकम देना तय हुआ। गणतंत्र दिवस पर कमलेश धाकड़ दोपहर 12 बजे सहीराम के सरकारी आवास पर पहुंचा। जहां एक लाख रुपए रिश्वत की रकम लेते ही एसीबी टीम ने सहीराम और रिश्वत कमलेश धाकड़ को गिरफ्तार कर लिया।

जगतपुरा के घर में मिले 2.26 करोड़ रुपए, मशीन से गिने नोट :
सहीराम मीणा 1989 बैच से हैं। जुलाई 2019 में रिटायर होने वाले हैं। बाबा आरएन गौड गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड जयपुर के नाम से सहीराम मीणा के नाम 23 प्लाट।

सहीराम के बेटे मनीष के नाम 23 प्लाट ।

सहीराम की पत्नी प्रेमलता के नाम 42 प्लाट ।

सहीराम के रिश्तेदारों के नाम से 12 प्लाट ।

प्रेमलता के नाम 42 दुकानों के आवंटन पत्र ।

वाटिका रोड पर प्रेम पैराडाइज के नाम से स्थित मैरिज गार्डन के दस्तावेज।

सवाई गैटोर आदिनाथ नगर स्थित प्लाट नंबर 52 व 53 के कागजात, ये कागजात आरोपी सहीराम की पत्नी व पुत्रवधू के नाम से हैं।
गोपालपुरा गृह निर्माण सहकारी समिति लि. से आरेापी की पत्नी प्रेमलता के नाम 4 प्लाट।

सहीराम की पत्नी के नाम भोज्यावाड़ा में 5 बीघा कृषि भूमि।

नई दिल्ली बसंत कुंज स्थित सेक्टर छह व सात में फ्लैट।

जयपुर गणपति प्लाजा में दुकान।

पत्नी प्रेमलता व पुत्रवधू विजयलक्ष्मी के नाम से सीतापुरा इंडस्ट्रीज में दो प्लाट।

बेटे मनीष के नाम से मुंबई में एक फ्लैट

प्रताप नगर कुमुद नगर में एक दुकान।

स्वामी विवेकानंद एजुकेशन सोसायटी का रजिस्ट्रेशन

एक एसेंट, इनोवा, मोटरसाइकिल, होंडा इमेज व लांसर कार

सीतापुरा में लक्ष्मी फिलींग स्टेशन पर तलाशी में तीन लाख 7 हजार सात सौ रूपए, पेट्रोल पंप के पास के प्लाट, चार बडे दस चक्का ट्रक के कागजात व एक एमजी टायर फर्म के कागजात मिले हैं।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *