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प्रयागराज : दिगंबर अखाड़े में 2 सिलेंडर फटे, रसोई घर का पंडाल जला

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संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित हो रहे कुंभ मेले में सोमवार को आग की घटना सामने आई है. यहां दिगंबर अखाड़े और उसके पास वाले टेंट में आग लग गई. दमकल की कई गाडि़यां मौके पर आग बुझाने में जुटी हुई है. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक यह आग रसोई गैस सिलेंडर में ब्‍लास्‍ट के कारण हुई है. साधु-संत और अन्‍य सभी लोग पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

पुलिस अधीक्षक (कुंभ मेला सुरक्षा) के अनुसार स्थिति अब सामान्‍य है. पुलिस के मुताबिक आग पर जल्‍द ही काबू पा लिया गया है. खाना बनाते वक्‍त लापरवाही से यह आग लगी है. आग लगने के कारण जानने के लिए जांच लगातार जारी है. इस आग से दिगंबर अखाड़े को सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है.

आग लगने की घटना के दौरान भी कई सिलेंडर ब्‍लास्‍ट की आवाज सुनी गई है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. इलाके में साधु-संतों के बीच आग की घटना को लेकर अफरातफरी मची है. बता दें कि कुंभ की शुरुआत कल हो रही है. इसका पहला शाही स्‍नान भी कल यानी मंगलवार को होना है.

पहले सिर्फ 20 वर्ग किमी इलाके में लगता था मेला

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला प्रयागराज कुंभ मंगलवार को मकर संक्रांति के साथ शुरू हो रहा है। यह 15 जनवरी से 4 मार्च तक कुल 49 दिन चलेगा। इस बार इसमें करीब 13 से 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है। इसमें करीब 10 लाख विदेशी नागरिक शामिल होंगे। उत्तरप्रदेश सरकार कुंभ 2019 को अब तक का सबसे भव्य कुंभ बता रही है। वहीं, स्नान पर्व को देखते हुए प्रयागराज में 14 जनवरी से 16 जनवरी तक (3 दिन) सभी 12वीं तक स्कूल और कॉलेजों बंद रखे जाएंगे। जिलाधिकारी ने कॉलेजों को इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है।

सरकार के मुताबिक, पहली बार मेला क्षेत्र करीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला है। पहले यह सिर्फ 20 वर्ग किमी इलाके में ही हाेता था। मेले में 50 करोड़ की लागत से 4 टेंट सिटी बसाई गई हैं, जिनके नाम कल्प वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी, इन्द्रप्रस्थम सिटी हैं। कुंभ के दौरान प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा अस्थायी शहर बस जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुंभ के आयोजन पर 4300 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इस बार कुंभ की थीम- स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ है। सरकार ने 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें कुंभ में आने का निमंत्रण भी दिया है।

कुंभ में 6 मुख्य स्नान पर्व, तीन शाही स्नान

भारत में 4 जगहों पर कुंभ होता है। इनके नाम- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। इनमें से हर स्थान पर 12वें साल कुंभ होता है। प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। प्रयागराज में पिछला कुंभ 2013 में हुआ था। 2019 में यह अर्द्धकुंभ है। हालांकि यूपी सरकार इसे कुंभ बता रही है। प्रयागराज में पूर्ण कुंभ 2025 में होगा।

  • कब आता है कुंभ
  • प्रयागराज कुंभ मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू होता है, जब सूर्य और चंद्रमा वृश्चिक राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं।
  • मान्यता : कुंभ का मतलब कलश होता है। इसका संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से है। मान्यता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां ये बूंदें गिरीं, वहीं पर कुंभ होता है। इन नदियों के नाम- गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा हैं।
  • शाही स्नान : 15, 21 जनवरी, 4,10,19 फरवरी, 4 मार्च
  • इतिहास : प्रयाग कुंभ का लिखित इतिहास में जिक्र गुप्तकाल में (चौथी से छठी सदी) मिलता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किताब में कुंभ का जिक्र किया। वह 617 से 647 ईसवीं तक भारत में रहे थे। लिखा है कि प्रयाग में राजा हर्षवर्धन ने अपना सब कुछ दान कर राजधानी लौट जाते हैं।
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