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बीमार था पति तो पड़ोसी की दीवानी हो गई पत्नी…पूरी हुईं जरूरतें तो हर दिन उसे घर बुलाने लगी

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New Delhi : जब एक पत्नी पति को उसके सबसे खराब समय में धोखा देती है तो क्या होता है। आज हम आपको वाराणसी के अनीता और प्रमोद की ऐसी ही कहानी बता रहे हैं। फिलहाल अनीता जेल में है। अनीता एक आधुनिक विचारधारा की युवती थी। यूं तो खूबसूरती उसे कुदरत ने जन्म से तोहफे में बख्शी थी, लेकिन अब जब उसने लड़कपन के पड़ाव को पार यौ वन की बहार में कदम रखा तो उसकी खूबसूरती संभाले नहीं सम्भल रही थी।

यद्यपि वह शादी-शुदा थी, पर टी.बी. रोग से पीडि़त अपने पति से संतुष्ट नहीं थी तथा बीमारी से उसकी आर्थिक स्थिति भी दयनीय हो गई थी। इस कारण वह जल्द ही प्रमोद के प्रेम जाल में आ फंसी थी। प्रमोद भी विवाहित था तथा उसके दो बच्चे भी थे, पर वह वाराणसी में अकेले ही रहता था। स्वभाव से रंगीन मिजाज प्रमोद को अपनी पत्नी का साधारण नैन-नक्ष पसंद नही था। यही वजह थी कि उसने अपनी पत्नी को गांव में अपने पिता के पास छोड़ रखा था। वाराणसी में अनीता से एक बार परिचय हुआ तो जल्द ही दोनों एक-दूसरे के इतने निकट आ गए, कि उनके बीच अंतरंग संबं ध भी कायम हो गये। वक्त के साथ उनका प्यार परवान चढ़ता रहा। दरअसल प्रमोद को अनीता की हर अदा काफी पसंद थी।

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साल-दो साल बाद जब उसके पति का देहांत हो गया, तो अनीता ने प्रमोद से दूसरी शादी कर ली। शादी के बाद प्रमोद ने उसके तीनों बच्चों को भी ने अपना लिया था। अनीता शुरू से ही दिलफेंक और मनचली युवती थी। एक खूंटे से बंधकर रहना उसकी आदत में शुमार नही था।

शुरू के कुछ वर्ष तो वह प्रमोद के प्रति पूरी निष्ठावान रही, पर जल्द ही उसके पांव डगमगाने लगे और वह छिपी नजरों से अपने किसी नये प्रेमी की तलाश में लग गयी। उसकी पड़ोस में विजय रहता था। पड़ोसी होने की वजह से विजय व प्रमोद में अच्छी जान-पहचान थी तथा दोनों एक-दूसरे के घर अक्सर आते-जाते रहते थे। अचानक प्रमोद का काम किन्ही कारणों से ठप पड़ गया, जिस कारण वह आर्थिक परेशानी में आ गया। ऐ

से समय में विजय ने उसकी आर्थिक मदद की। विजय की स्वार्थ रहित मदद लगातार मिलते रहने पर अनीता के अंदर विजय के प्रति एक अहसान का भाव घर कर गया। साथ ही वह विजय की नेकी से भी काफी प्रभावित थी। इस कारण उसका झुकाव विजय की तरफ बढ़ता चला गया। अब विजय, प्रमोद व बच्चों की अनुपस्थिति में देर तक उसके घर में रहने लगा।

पड़ोसियों को जब यह सं बंध खटकने लगा तो दबी जुबान से इसकी चर्चा में होने लगी। उड़ते-उड़ते यह खबर प्रमोद तक भी जा पहुंची। तब उसने अनीता को विजय से संबं ध रखने को मना किया, अपने बच्चों और घर-परिवार की दुहाई दी, किन्तु कामांध अनीता को प्रमोद के उपदेश अच्छे नही लगे। जब पानी सर के उपर गुजरने लगा , तो प्रमोद के लिए अनीता का यह व्यभिचार असहनीय हो गया। वह अनीता के साथ मा र पी ट करने लगा।

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विजय से प्रमोद झगड़ा मोल लेना नही चाहता था, क्योंकि उसे भय था कि विजय उसकी आर्थिक मदद बंद कर सकता है। जब अनीता ने विजय से अपना संबं ध नहीं तोड़ा, तब प्रमोद ने वहां से मकान खाली कर लेने का निर्णय कर लिया। दरअसल प्रमोद की सोच थी कि दूसरी जगह चले जान पर अनीता व विजय की दोस्ती टूट सकती हैं। लेकिन प्रमोद की यह सोच गलत साबित हुई, यहां भी अनीता व विजय का आपस में मिलना-जुलना जारी रहा। अब प्रमोद को समझ में नही आ रहा था कि वह क्या करे।

उसने हर कोशिश करके देख ली थी, पर अनीता विजय से अपना संबं ध तोड़ने को राजी नही थी। लिहाजा प्रमोद मानसिक तनाव में रहने लगा। वह जब-तब बिना किसी वजह के अनीता को पी ट डालता, वहीं विजय को भी भला-बुरा करने पर अब उसे कोई संकोच नहीं था।

यों कहें कि अनीता ने अपनी हरकतों से प्रमोद को मानसिक रूप से बीमार कर दिया था। प्रमोद द्वारा लगातार मा र-पी ट किये जाने से अनीता आखिरकार उससे तंग आ गयी और उसने अपनी परेशनी विजय को बतायी। जिसके बाद अनीता और विजय ने मिलकर प्रमोद की ह’त्या कर दी। इसके बाद वह सावधानी पूर्वक वहां से निकल भागा। अगले दिन विजय ने फोन कर इस घटना की सूचना अनीता को दी, अनीता इससे काफी खुश हुई। उसने सोचा अब वह विजय के साथ नई ग्रहस्थी बसायेगी। पर पुलिस की सूझबूझ से अनीता व विजय गिरफ्तार कर लिए गए।

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