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रिश्ते

बेटी की शादी वाले दिन पिता की मौत…मरते-मरते पिता ने कहा-मेरी लाडली को कुछ मत बताना

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जोधपुर की राउप्रावि कुम्हारों की ढाणी बनाड़ में गत वर्ष तक कार्य करने वाले पीटीआई सुभाषचंद्र कटेवा के मन में अपनी बेटी रीतू की शादी को लेकर कई अरमान थे। बेटी की धूमधाम से विदाई के लिए कई तैयारियां भी की थीं। हालांकि नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। दो साल से ब्रेन ट्यूमर से जूझने के बावजूद सुभाष शादी को लेकर खासे उत्साहित थे। 22 जनवरी को रीतू की शादी होनी थी।

इसी बीच सुभाष की तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें 17 से 20 जनवरी तक जयपुर स्थित भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में रखा गया। तबीयत जरा सी सुधरी तो उन्होंने बेटी की शादी में जाने की इच्छा जताई। इस पर 21 जनवरी को उन्हें झुंझुनूं बख्तावरपुर स्थित घर लाया गया। इसी दिन सुभाष की तबीयत बिगड़ी तो बेटी उनसे लिपटकर खूब रोई। बोली- पापा आप ठीक हो जाओ, आपके हाथों से ही विदा होऊंगी। सुभाष ने भी अपनी पत्नी इंद्रा और बेटे अमित से कहा, बेटी की शादी में कोई कमी नहीं रहे, बारात और मेहमानों आवभगत ठाठ-बाट से होनी चाहिए। सुभाष की हालत देखते हुए बेटा अमित उन्हें लेकर जयपुर स्थित हॉस्पिटल पहुंचा।

सूचना पर सुभाष के दोस्त बालमुकुंद व हुकमसिंह भी उन्हें संभालने पहुंचे। घर में रीतू की शादी को देखते हुए उन्होंने 22 जनवरी को भाई अमित को वापस भेजा। 22 जनवरी को जोधपुर के सारण नगर से दूल्हे पवन फेरे लेने बख्तावरपुर पहुंचे। 23 जनवरी को सुभाष का 55वां जन्मदिन भी था। बालमुकुंद व हुकमसिंह दोस्त के लिए हॉस्पिटल केक लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने बताया कि अब सुभाष कुछ ही देर के मेहमान हैं।

उधर बेटी विदा हो रही थी, और इधर हॉस्पिटल में सुभाष ने भी अंतिम सांस ली। ऐसे में सुभाष के दोस्तों ने हिम्मत रखी और घरवालों को बोल दिया कि रीतू और उसके ससुराल वालों को इस बात का पता नहीं चलना चाहिए। घर में खुशी के मौके पर आए इस गम से सबका धैर्य जवाब दे रहा था। शादी के रिवाजों के बाद जैसे ही रीतू की डोली जोधपुर के लिए रवाना हुई। दोस्त सुभाषचंद्र की देह लेकर घर आए। जहां से कुछ देर पहले डोली रवाना हुई, वहां अर्थी सजती देखकर हर शख्स रो पड़ा। सुभाष फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे। उनकी अंतिम विदाई में गांव का हर शख्स ट्रैक सूट में आया।

घर में इस अनहोनी के बावजूद दोस्तों ने परिवार से हिम्मत रखने को कहा। इस पर बेटी रीतू और उसके ससुराल वालों को इस बारे में कुछ नहीं बताया। कारण, 25 जनवरी को जोधपुर में वर पक्ष की ओर से रिसेप्शन था। एक ओर तो सुभाष के अंतिम संस्कार और रिवाज हो रहे थे, उधर अनजान बेटी का रिसेप्शन हुआ। 26 जनवरी को रीतू पगफेरे के लिए पीहर बख्तावरपुर आई तो उसका हृदय चीत्कार उठा। घर में आते ही जब उसने पिता की माला लगी तस्वीर देखी तो सुध-बुध खो बैठी। सीने को चीरती उसकी रुलाई सुनकर हर कोई बिलख पड़ा। अपने पापा के हाथों से विदा होने का सपना देखने वाली रीतू के सामने दिवंगत पिता की तस्वीर थी। एक पिता बेटी की शादी अपने हाथों से करने का आखिरी अरमान दिल में लिए ही विदा हो चुका था।

सुभाष ने जोधपुर में घर बनाने के लिए बनाड़ में प्लॉट भी लिया। पत्नी इंद्रावती अध्यापिका हैं। बेटी एलआईसी में मंडोर ब्रांच में डबल एओ हैं। बेटा अमित सिंडिकेट बैंक जोधपुर जेएनवीयू ब्रांच में पीओ है। सुभाष ने ब्रेन ट्यूमर होने पर 1 वर्ष पूर्व पैतृक गांव ट्रांसफर करवा लिया और वहां रहने लगे। परिवार जोधपुर में रह रहा था। दामाद पवन जालंधर में एलआईसी में डबल एओ हैं।

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