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मनोरंजन

बेहद ख़राब रहा इन सितारों का अंतिम समय, किसी को हुआ ए ड्स तो किसी का ठेले से शमशान पहुंचा शव!

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दोस्तों बॉलीवुड फिल्म जगत में ऐसे कई सितारे हैं जो दुनिया को अलविदा कह चुके हैं और उनके अंतिम दर्शन के लिए कई बड़े बड़े सितारे उनके घर पर पहुंचे थे और उनके अंतिम संस्कार में भी कई लोग शामिल होते थे। लेकिन कुछ ऐसे सितारे भी हुए थे कुछ सालों तक बॉलीवुड जगत में हिट रहने के बाद गुमनाम हो गए, और गुमनामी के इन अंधेरो मे ही इन सितारों ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। जिसके मरने के बाद कोई उनके अंतिम दर्शन को भी नही पहुंचा था। आज आपको कुछऐसे ही सितारों के बारे में बता रहे है, जिन्होंने फिल्मो अपने अभिनय अच्छा नाम कमाया लेकिन अंतिम समय में उनके हालात बद से बत्तर हो गए और वे बहुत बुरी स्थिति में इस दुनिया को अलविदा कह गए,आईये जानते है इन सितारों के बारे में!

परवीन बाबी


70, 80 के दशक अपने अभिनय और खूबसूरती से लोगो के दिलो पर राज करने वाली अभिनेत्री परवीन बाबी ने अपने 15 साल के करियर में लगभग 50 फिल्मों में काम किया, इनमें से 12 फिल्में उन्होंने अकेले अमिताभ बच्चन के साथ कीं। अपने दौर में परवीन बाबी सबसे महंगी अभिनेत्री थीं। लेकिन अंतिम समय में वे कुछ खा भी नई पाई थी, बता दे की उनको पैरानायड स्कित्जोफ्रेनिया नाम की बीमारी ने बाबी को बेसुध कर दिया। उम्र 56 हुई तो बिस्तर से उठ भी नहीं पाती थीं। 20 जनवरी 2005 को अकेले घर में उन्होंने दम तोड़ दिया। तीन दिन तक लाश बेड पर सड़ती रही। डॉक्टरों की रिपोर्ट अनुसार वे कई दिनों से भूखीं थीं क्योंकि उनके पेट में खाने की कोई टुकड़ा नही मौजूद था। डॉक्टरों ने ही इनका अंतिम संस्कार किया था।

ए. के. हंगल


बॉलीवुड फिल्म जगत में अपने अभिनय के दम पर खास पहचान बनाने वाले अभिनेता ए. के. हंगल साल 2012 में इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। सुपरहिट फिल्म शोले में ए. के. हंगल का फेमस डायलॉग ‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई’ लोगों को आज भी याद है। हंगल साहब ने कभी बुलंदियों को छुआ था लेकिन अंतिम दिनों में इलाज को पैसे भी न थे। मौत से पहले कई बीमारियों ने उन्हें घेर लिया। अमिताभ को जब पता चला तो 20 लाख की मदद भेज दी। लेकिन हंगल साहब न बच पाए।

गीतांजलि नागपाल


1990 दशक के शुरुआती दिनों में लेडी श्रीराम कॉलेज की गीतांजलि नागपाल पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन के साथ रैम्प पर कैटवॉक किया करती थीं, 32 साल की गीतांजलि साल 2007 में भीख मांगती हुई मिली थीं। फिल्मों में असफल हुई तो ड्रग की लत लग गई। अपनी जरूरत पूरी करने के लिए वो नौकरानी तक बन गई थीं। साल 2008 में तंगी से गुजरते हुए गीतांजलि नागपाल की मौत हो गई।

निशा नूर


80 के दशक में निशा साउथ फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा थीं। हर निर्माता-निर्देशक उनके साथ काम करना चाहता था। निशा नूर की लोकप्रियता का आलम ये था कि रजनीकांत से लेकर कमल हासन तक उनके साथ काम करने के लिए उत्साहित रहते थे। दोनों सितारों ने निशा नूर के साथ काम भी किया था। इतनी सफलता के बावजूद निशा की जिंदगी वीरान और दर्दभरी ही रही और उसी हालत में वो दुनिया से चल बसीं। खबरो की माने तो निशा नूर को नागोर दरगाह के पास मरणासन्न अवस्था में पाया गया था। उस वक्त उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि उनके शरीर पर कीड़े और चीटियां रेंग रही थीं और उनका ध्यान रखने के लिए कोई भी नहीं था। अस्पताल लाने पर पता चला कि निशा को एड्स है और इसके चलते उनकी हालत और खराब होती चली गई…और फिर साल 2007 में निशा नूर ने इस दुनिया से चली गईं।

विमी

60, 70 एक दशक की सुपरहिट फिल्म आबरू से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री विमी की कहानी बहुत दर्दनाक है। सुनील दत्त की फिल्म हमराज में विमी के काम को बहुत सराहा गया,  यह फिल्म इतनी हिट हुई कि विमी को करीब 10 फिल्मों में काम करने का मौका मिला। विमी का करियर अच्छा चल रहा था कि तभी उनके पति ने रूकावट डालनी शुरू कर दी। शादीशुदा विमी ने पति पर मा रपीट का आरो प लगाया। इसके बाद उन्होंने कोलकाता में अपना बिजनेस शुरू किया। लेकिन श राब की लत ने उन्हें ऐसा घेरा कि सबकुछ बिक गया। 22 अगस्त 1977 को नानावटी अस्पताल के जनरल वार्ड में उन्होंने दम तोड़ दिया। शरीर को चार कंधे न मिले तो अंतिम संस्कार के लिए उनकी बॉडी को एक ठेले पर ले जाना पड़ा।

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