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यह तैयारी है जरूरी, ताकि बच्चों को नुकसान न पहुंचा सके कोविड की तीसरी वेव

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पहले बुजुर्ग, फिर व्यस्क और अब बच्चों में कोरोना का खतरा बताया जा रहा है। जिस तेजी से कोरोना वायरस में म्यूटेशन हो रहा है, उससे तीसरी वेव में बच्चों में संक्रमण बढ़ने के खतरे का अनुमान लगाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि वायरस को जितना समय मिलेगा, उसमें बदलाव होता रहेगा और खतरा भी बढ़ता जाएगा। यही वजह है कि एक्सपर्ट अगली वेव आने से पहले इसकी तैयारी की सलाह दे रहे हैं। वहीं बचाव के तरीके भी बता रहे हैं।

कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि अगली बार इस खतरनाक वायरस की चपेट में बच्चों के आने की आशंका ज्यादा है। ऐसे मे कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता। बचाव के लिए अभी से होना होगा अलर्ट।

Kids in Covid 3rd Wave: यह तैयारी है जरूरी, ताकि बच्चों को नुकसान न पहुंचा सके कोविड की तीसरी वेव

पहले बुजुर्ग, फिर व्यस्क और अब बच्चों में कोरोना का खतरा बताया जा रहा है। जिस तेजी से कोरोना वायरस में म्यूटेशन हो रहा है, उससे तीसरी वेव में बच्चों में संक्रमण बढ़ने के खतरे का अनुमान लगाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि वायरस को जितना समय मिलेगा, उसमें बदलाव होता रहेगा और खतरा भी बढ़ता जाएगा। यही वजह है कि एक्सपर्ट अगली वेव आने से पहले इसकी तैयारी की सलाह दे रहे हैं। वहीं बचाव के तरीके भी बता रहे हैं।

नया वेरिएंट बढ़ा रहा है खतरा
नया वेरिएंट बढ़ा रहा है खतरा

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेसिडेंट और पीडियाट्रिक्स एक्सपर्ट डॉक्टर अरुण गुप्ता ने कहा कि पहली और दूसरी वेव में वायरस के संपर्क में बुजुर्ग और व्यस्क आए। पहली वेव में बच्चे एक तरह से क्वारंटीन थे, तो वे बच गए। दूसरी वेव में कुछ बच्चों में संक्रमण हुआ, लेकिन अधिकांश में लक्षण नहीं आए। बहुत कम को एडमिट करना पड़, लेकिन इस बार एक नया वेव, नया वेरिएंट और उनके लिए वैक्सीन न होना खतरे को बढ़ा रहा है। इन्फेक्शन एक्सपर्ट डॉक्टर नरेंद्र सैनी ने कहा कि बैक्टीरिया बाहर और ह्यूमन सेल दोनों में ग्रो करता है। इसी तरह फंगस भी ग्रो करता है, लेकिन वायरस को जब तक लिविंग सेल यानी ह्यूमन बॉडी नहीं मिलेगी, तो यह ग्रो नहीं कर पाएगा। मर जाएगा। कोरोना एक वायरस है और यह अब तक इसलिए फैल रहा है क्योंकि इसे फैलने के लिए लिविंग सेल मिल रहे हैं।

इसलिए बच्चों में अब ज्यादा खतरा
इसलिए बच्चों में अब ज्यादा खतरा

डॉक्टर सैनी ने कहा कि वायरस की खुद में बदलाव करने की प्रकृति और क्षमता होती है। जब पहली वेव आई थी, तो बुजुर्ग को ज्यादा खतरा था क्योंकि उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। बुजुर्गों का वैक्सीनेशन हुआ। अगली वेव आई। वायरस में कुछ बदलाव देखे गए तो यंग अडल्ट इसके शिकार हुए, क्योंकि वायरस को फैलने के लिए ऐसे लोग मिले, जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी, जिनके पास एंटीबॉडी नहीं थे। अब ऐसे लोगों में वैक्सीनेशन हो रहा है। इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा कि अगली वेव बच्चे को शिकार बना सकती है। दरअसल वायरस अपना नया रूप धारण करना जारी रख सकता है। ऊपर से बच्चों का न तो वैक्सीनेशन हुआ है और न ही उनमें एंटीबॉडी बनी हैं। अब वायरस को फैलने के लिए जो जगह चाहिए, वो बच्चे ही हैं। इसलिए अगली वेव में उनमें ज्यादो खतरा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

क्या सीखा है अब तक
क्या सीखा है अब तक

डॉक्टर सैनी ने कहा कि अभी तक हम 3 चीजें सीखे हैं। कोरोना के इलाज के लिए पहला ऑक्सिजन का प्रयोग, वेंटिलेटर की जरूरत और समय पर स्टेरॉयड का इस्तेमाल, लेकिन आने वाली चुनौती अलग होगी। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर इलाज की तैयारी अलग करनी होगी। सरकार से लेकर माता-पिता की जिम्मेदारी अलग होगी।

आईसीयू व वेंटिलेटर का सेटअप अलग
आईसीयू व वेंटिलेटर का सेटअप अलग

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेसिडेंट और पीडियाट्रिक्स एक्सपर्ट डॉक्टर अरुण गुप्ता ने कहा कि बच्चों के आईसीयू का डिजाइन ही अलग होता है। तापमान अलग होता है। बड़ों वाला वेंटिलेटर बच्चों में नहीं लगता है। इलाज के कई इक्विपमेंट अलग होते हैं, जिसमें सिरिंज से लेकर ब्लड प्रेशर नापने तक की मशीन का साइज अलग होता है। अभी से इसकी तैयारी करनी होगी। उन्होंने बताया कि जीटीबी के पास रामलीला मैदान में बनाए गए आईसीयू सेंटर में जो वेंटिलेटर सेटअप लगाया गया है, वह बड़ों और बच्चे दोनों के काम आता है। इस प्रकार की और तैयारी करनी होगी।

बच्चों के इलाज के लिए बनाने होंगे प्रोटोकॉल
बच्चों के इलाज के लिए बनाने होंगे प्रोटोकॉल

डॉक्टर सैनी ने कहा कि बच्चों को आईसीयू और वेंटिलेटर पर मैनेज करना आसान नहीं होता है। इसके लिए अलग प्रोटोकॉल बनाने होंगे। इसके लिए ट्रेंड नर्सिंग केयर और ज्यादा स्टाफ की जरूरत होगी। दोगुने डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ की जरूरत होगी। बहुत छोटे बच्चे पैरेंटस के बिना नहीं रह पाते। ऐसे में संक्रमित बच्चे के पास माता-पिता को रहने की अनुमति देना। उनके लिए पीपीई किट्स आदि का इंतजाम करना। माता-पिता के लिए आइसोलेशन जैसी सुविधाओं पर भी फोकस करना होगा। बच्चों के वार्ड, आईसीयू और वेंटिलेटर की तैयारी करनी होगी।

बच्चों को संक्रमण से बचाने पर दें ध्यान
बच्चों को संक्रमण से बचाने पर दें ध्यान

12 साल से बड़े बच्चे को अडल्ट की तरह हर प्रकार के कोविड गाइडलाइन का पालन करें

2 से 12 साल के बीच वाले बच्चे को माता-पिता की निगरानी में ही मास्क पहनना चाहिए

2 साल से कम के बच्चे के लिए मास्क एडवाइज नहीं किया जाती, बच्चे को दिक्कत हो सकती है

इसके अलावा बच्चे और पैरेंट्स को साफ-सफाई और हाइजीन का खास ख्याल रखना होगा

माता-पिता को जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराना चाहिए, क्योंकि बच्चों में संक्रमण उनसे आ सकता है

जितना जल्दी वैक्सीनेशन पूरा होगा, उतना ही संक्रमण फैलने का खतरा कम होता जाएगा

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