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रमेश ने बचाई आसिमा की जान लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने रमेश की जिंदगी को हिलाकर रख दिया

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक कहानी वायरल हो रही है। यह घटना सत्य है। यह घटना कोल्हापुर महाराष्ट्र की है। ये घटना बहुत कुछ सिखाती और इसी लिए हम इसे सभी पाठकों के समक्ष पहुंचा रहे हैं।रमेश गुप्ता कोल्हापुर का रहने वाला था और मुम्बई से बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। दिनांक 22 नवम्बर 2018 को रमेश मुम्बई से अपने घर के लिए निकला था।

रमेश अपनी खुद की मोटरसाइकिल से आ रहा था। रास्ते में मुम्बई हाइवे पर उसने देखा कि कुछ लोग एक लड़की को खींचकर एक बेन में डाल रहे थे। रमेश एक जवान युवक था। उसने जब यह सब देखा तो उसका खून खौल उठा और वह वैन के पास जाकर उस लड़की को बचाने लगा। वैन में तीन लोग थे। रमेश उन लोगों से भिड गया। काफी देर तक रमेश उन लोगों से संघर्ष करता रहा। जब उन लोगों ने सोंचा कि अब इस लड़के से टक्कर लेना मुश्किल है, तो उन लोगों ने रमेश पर गोलियां चला दीं। वो लोग तो वैन लेकर भाग गए किन्तु रमेश बुरी तरह से जख्मी हो गया। रमेश ने उस लड़की की मदद से अपने घर वालों को सूचना दे दी और स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस से यमुना अस्पताल में पहुँच गया। उस लड़की का नाम आशिमा था। आशिमा वाशी की रहने वाली थी और उस दिन खरीददारी करके इनोर्विट माल से आ रही थी।

आशिमा के पिता अख्तर अंसारी एक प्लास्टिक की फैक्टरी चलाते हैं। रमेश की जान बच गई किन्तु एफआईआर के समय आशिमा बिल्कुल मुकर गई और उसने किसी भी हादसे के होने से साफ़ इन्कार कर दिया। रमेश बहुत दुखी था और वह उन लोगों को सजा दिलाना चाहता था किन्तु आशिमा ने उसका साथ नहीं दिया। जब रमेश ने आशिमा से पुलिस को सच बताने पर दबाव डाला तो उसके पिता ने रमेश को ही जान से मार देने की धमकी दे दी। रमेश बिल्कुल टूट गया था।

उसने सपने में भी नहीं सोंचा था कि जिसे वह बचाने जा रहा है वही उसे धोखा देगा। हालांकि रमेश ने एफ आई आर दर्ज कराई किन्तु अभी तक उसमे कुछ नहीं हुआ है। रमेश अभी भी पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं है किन्तु रमेश एक बात जरूर सीख गया है कि वह भविष्य में किसी अनजान के लिए अपनी जान जोखिम में नहीं डालेगा। रमेश के गोलियों के जख्म जरूर भर जायेगे किन्तु आशिमा द्वारा दिया गया धोखे का जख्म उसकी सारी उम्र नहीं भर पायेगा। तो दोस्तों मदद करने के बदले उसे क्या मिला…इसलिए कहते हैं अब मदद भी सोच समझकर करनी चाहिए।

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