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राधे मां ने खाई कसम..अब किसी भक्त की गोद में नहीं बैठूंगी..वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

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राधे मां… वही विवादित राधे मां, जो अक्सर नाचते-नाचते अपने भक्तों की गोद में जा बैठती थीं। अपनी अदाओं पर उसे खूब गुमान था। लोग तालियां बजाते थे और भक्त मोहित हो जाते थे। बरसों से अपनी इस हरकत की वजह से राधे मां सुर्खियों में रही। जूना अखाड़े को राधे मां का डांस नहीं भाया, निकाल दिया। महामंडलेश्वर की पदवी भी छीन ली गई।

राधे मां कहीं की नहीं रहीं। खूब गिडगिड़ाई, अपनी गलती मानी, लिखित माफी भी मांगी, तब जाकर जूना अखाड़े ने राधे मां को स्वीकार किया। महामंडलेश्वर की उपाधि को लौटाया। अब राधे मां फिर से जूना अखाड़े के संग है। कुंभ मेले में उसकी अपनी हस्ती होगी। लोग वह नजर भर कर देखेंगे। राधे मां अब भक्तों की गोद में नहीं बैठेंगी। इसके लिए एक लिखित माफीनामा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भविष्य में वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगी, जो अखाड़े के नियमों के खिलाफ हो। माफीनामे के बाद जूना अखाड़े ने न केवल राधे मां का निलंबन रद्द कर दिया है, बल्कि उन्हें उनकी महामंडलेश्वर की पदवी भी वापस दे दी है।

बता दें कि पिछले दिनों अखाड़े की तरफ से ढोंगी बाबाओं और संतों को लेकर एक लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें राधे मां का नाम भी शामिल था। राधे मां के अलावा पायलट बाबा की भी अखाड़े में वापसी हुई है। राधे मां ने जूना अखाड़े को एक लिखित माफीनामा दिया है। राधे मां ने लिखित तौर पर माफी मांगते हुए कसम खाकर कहा है कि अब वह कभी भक्तों की गोद में बैठकर डांस नहीं करेंगी। राधा मां ने कहा है कि उनकी तरफ से ऐसा काम नहीं किया जाएगा, जिससे अखाड़ा के नियम टूटें। माफी के बाद राधे मां अब 25 दिसंबर को प्रयागराज कुंभ मेले में जूना अखाड़े की पेशवाई में शामिल होंगी।

अखाड़े में वापसी के बाद अब कुंभ मेले में महामंडलेश्वर के तौर पर राधे मां को जमीन और दूसरी अन्य सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, अखाड़े में राधे मां की वापसी को लेकर विवाद भी हो रहा है। राधे मां को फिर से अखाड़े में शामिल करने पर कुछ संतों ने विरोध जताया है। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने अखाड़ा से प्रार्थना की है कि वह अपने इस फैसले पर फिर से विचार करे। हालांकि, अखाड़ा अपने फैसले लेने में स्वतंत्र है, लेकिन बताया जाता है कि राधे मां की वापसी के फैसले में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी को नहीं बताया गया था।

बता दें कि राधे मां असली नाम सुखविंदर कौर है। राधे मां का जन्म पंजाब के दोरांगला गांव में हुआ था। बताया जाता है कि 17 साल की उम्र में उनकी शादी मोहन सिंह नामक शख्स से हुई थी, लेकिन शादी के चार साल बाद उन्हें और उनके दो बच्चों को पति छोड़कर चला गया था। कहा जाता है कि वह शुरू से ही भगवान की भक्ति में लीन रहती थीं, इसलिए जब पति उन्हें छोड़कर गया, तो उन्होंने गुरु मां बनने का फैसला किया। राधे मां लाल रंग के कपड़े पहनती हैं और उनके हाथ में हमेशा एक त्रिशूल रहता है। उनके भक्त कहते हैं कि वह इसी के जरिये मां दुर्गा से साक्षात्कार करती हैं।

पिछले दिनों डॉली बिंद्रा ने राधे मां पर आरोप लगाया था कि उन्होंने चंडीगढ़ में एक बड़े पुलिस अधिकारी के आवास पर उनका यौन शोषण करवाया था। बिंद्रा ने इस बारे में एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2015 में राधे मां और उनके भक्तों ने उन्हें चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस के एक बड़े अधिकारी के आवास पर यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया था। इसके खिलाफ उन्होंने तुरंत आवाज उठाई थी, लेकिन राधे मां और पुलिस अधिकारी की ऊंची पहुंच के कारण मामला रफा-दफा हो गया। बिंद्रा ने कहा था कि उन्होंने अपने साथ हुई गंदी हरकत की शिकायत यूटी पुलिस में भी दर्ज करवाई थी, लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया।

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