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लखपति बेटों ने बूढे मां- बाप को घर से निकाला..फिर बेटों के साथ जो हुआ उससे हर बेटा ले सबक

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मुनव्वर राना का यह शेर इस खबर पर पूरी तरह मौजूं है जिन्होंने मां पर दिल छूने वाला कविताएं लिखी हैं। शहर के चिखली चौक में पांच कलयुगी बेटों ने अपनी दिव्यांग बेबस मां और 86 साल के बाप को घर से बेदखल कर झाेपड़ी में रहने काे मजबूर किया। मां-बाप पूरे पंद्रह बरस से झोपड़ी में गुजर कर रहे हैं। पिता हीरालाल साहू का सब्र झलका तो पुलिस ने पांचों कलयुगी पुत्रों को गिरफ्तार कर लिया।

पीड़ित पिता हीरालाल साहू ने बताया कि उसकी खरीदी जमीन पर उसके पांच बेटे सुमरन लाल, हुकूम साहू, प्रमोद साहू, उमाशंकर और कीर्तन साहू ने मिलकर मकान बना लिया। इसके कुछ समय बाद पांचों भाइयों ने मिलकर अपने पिता और दिव्यांग मां को घर से बाहर निकाल दिया। 86 साल के हीरालाल पत्नी के साथ 15 साल से झोपड़ी में ही जीवन काट रहे थे। बेटों से कई बार वापस घर में रखने की मिन्नत की, लेकिन बेटे नहीं माने। बात करने को भी तैयार नहीं हो रहे थे। जैसे तैसे झोपड़ी में जीवनयापन करते हुए हीरालाल ने हिम्मत जुटाई और चिखली थाने में अपने पांचों बेटों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। चिखली पुलिस ने वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2007 की धारा 24 के तहत पांचों बेटों पर मामला दर्ज कर लिया।

गर्वमेंट प्रेस के कर्मचारी रह चुके हीरालाल साहू : हीरालाल साहू शासकीय प्रेस के कर्मचारी थे। नौकरी के दौरान ही उन्होंने अपने नाम जमीन ये सोचकर खरीदी थी कि भविष्य में बेटों और पोतो के साथ जिंदगी की दूसरी पारी बिताएंगे। लेकिन इसी जमीन पर पांचों बेटों ने सहमति से मकान बना लिया और फिर मकान में खुद के परिवार को रखकर बुजुर्ग माता-पिता को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कार्रवाई के बाद अब हीरालाल अपने जमीन पर बने मकान में जीवन बीता सकेंगे। पिछले पंद्रह साल से बेटों की करतूत के चलते वे झोपड़ी में जिंदगी बसर कर रहे थे।

चार बेटों को किया गिरफ्तार, मिली जमानत :  शिकायत के बाद पुलिस ने उसके चार बेटों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। हीरालाल का एक बेटा भोपाल में रहता है, इसके चलते पुलिस नहीं पहुंच पाई है। गिरफ्तार चार बेटों को जल्द ही से जमानत भी मिली गई। पुलिस ने बताया कि जमानती धारा होने के चलते बेटों को जमानत मिल गई। जमानत के बाद चारों बेटे ने अपने माता-पिता को घर ले जाने की भी बात कही।

बाढ़ पीड़ितों की मदद को दिए थे 70 हजार रुपए :  जिंदगी के सबसे अहम पड़ाव में बेटों की बेदखली के चलते झोपड़ी में जीवन काटने वाले हीरालाल परोपकार के भी बड़े चेहरे हैं। उन्होंने केरल में आए बाढ़ से हुई तबाही के बाद बाढ़ पीड़ितों के लिए 70 हजार रुपए की मदद भी की थी।

जिला प्रशासन के माध्यम से उन्होंने अपने नौकरी के दौरान जुटाए रकम का हिस्सा बाढ़ पीड़ितों के लिए दान किया था।

एक बेटा रिटायर हो चुका : बड़ा बेटा सुमरन 64 साल का है। वह शासकीय मुद्रणालय में पदस्थ रहे। वहीं दूसरा बेटा प्रमोद भोपाल की एक प्राइवेट फैक्ट्री में नौकरी है। उमाशंकर और हुकुम दुर्ग में प्राइवेट जॉब करते हैं। फिर भी माता-पिता का खयाल नहीं रखा।

मां-बाप ही हमारी प्राॅपर्टी सहेज कर रखें इन्हें : माता-पिता ही सबसे बड़ी प्राॅपर्टी हैं। इन्हें सहेजकर रखें। उम्र के इस पड़ाव में माता-पिता को अपने बच्चों से कई उम्मीदें रहती हैं। बच्चों को उन पर खरा उतरने की जरूरत है। इस मामले से भी नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

इसके अलावा हम ऐसे बुजुर्गों से खुलकर सामने आने की अपील करते हैं, जो अपने बच्चों की ऐसी हरकतों से हीरालाल की तरह तकलीफ झेल रहे हैं। कानून के मुताबिक उन्हें हक मिलेगा। डॉ. प्रशांत शुक्ला, सीएसपी

 

पांच बेटों पर कार्रवाई : रिटायर्ड कर्मचारी ने अपने बेटों पर घर से बेदखली की शिकायत की थी, इसके बाद अधिनियम के तहत उनके पांचों बेटों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जमानती धारा होने के चलते उनके बेटों को जमानत मिल गई। अब हीरालाल अपने घर में रह सकेंगे। लाल मुनाई सिंह, प्रभारी चिखली चौकी

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