fbpx
Connect with us

विशेष

लोगों ने अपनी आंखों से देखा चमत्कार… जब मां वैष्णों देवी ने खुद आकर बचाई भक्तों की जान

Published

on

New Delhi : कहते हैं कि कण कण में भगवान बसे है बस भक्त सच्चे मन से उन्हें पुकारे तो भगवान उसकी रक्षा स्वयं करते है। इसका जीता-जागता प्रमाण वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर डाला – बारी खनन क्षेत्र में स्थित मां वैष्णो देवी का मंदिर है। जो अपनी स्थापना के बाद से ही विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां रोजाना ही भक्तों की भीड़ लगी होती है।

क्या है इतिहास : मां वैष्णो शक्तिपीठ धाम की स्थापना का इतिहास एक आश्चर्यजनक घटना पर आधारित है। सन 2001 में चोपन निवासी मदनलाल गर्ग अपने घर से कार द्वारा डाला के बारी क्षेत्र में स्थित क्रशर प्लांट पर आ रहे थे कि अचानक उनकी कार उस समय किलर रोड के उपनाम से जानी जाने वाली वाराणसी – शक्तिनगर मार्ग पर सामने से आ रही ट्रक में जा घुसी । दुर्घटना जबर्दस्त थी, जिसे देखकर लोग बड़ी घटना की आशंका व्यक्त कर रहे थे। घंटों प्रयास के बाद जब ट्रक के अन्दर से कार को निकाला गया और कार में सवार लोग बिल्कुल सुरक्षित निकलने और यह देख लोग आश्चर्यचकित हो गये। उसी समय मदनलाल के मुख से मां वैष्णो का नाम निकला और तभी क्रशर एसोसिएशन के लोगों ने मां वैष्णो का मंदिर निर्माण कराये जाने की ठान ली। वाराणसी शक्तिनगर मार्ग को सुप्रीम कोर्ट ने किलर रोड नाम दिया था क्योंकि उस समय आये दिन वहाँ दुर्घटना हुआ करता था और यही कारण था कि मदनलाल और उनके सहयोगियों ने दुर्घटना वाले स्थान के ठीक सामने ही जम्मू से अखंड ज्योति लाकर भव्य मंदिर का निर्माण कराया| जिसके निर्माण में तीन साल से ज्यादा का समय लगा।

क्या है विशेषता : यह क्षेत्र पहाड़ों से घिरा और सोन नदी के किनारे पर है , यहां पत्थर की खदाने और क्रशर प्लांट ही थे लोगों ने इतने बड़े मंदिर निर्माण की कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन जब मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तो मां की असीम कृपा से पैसा आता गया और मंदिर निर्माण का कार्य बढ़ता गया। मंदिर निर्माण के लिए कभी पैसों की कमी नहीं हुई। जिस दिन जम्मू से अखंड ज्योति नवनिर्मित मंदिर में लाई गयी तो अचानक मौसम बदल गया और एकाएक तेज हवा, बादलों की गरज के साथ घनघोर बारिश हुई, जिससे लोगों को एहसास हुआ कि वास्तव में कोई शक्ति का पदार्पण मंदिर में हुआ है।

गुफा से जाना होगा मन्दिर में: मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए पहले आपको गुफा से होकर गुजरना होगा जो अपने आप में बिलकुल प्राकृतिक लगता है। इस गुफा में जगह-जगह जंगल और जंगली जानवर हाथी, बाघ ,चीता, लंगूर, बंदर, भालू, सांप का प्रतिरूप निर्मित है जिसे एक बारगी देख श्रद्धालु डर जाते हैं वहीँ उनको देखकर भक्तों को अच्छा लगता है |

मंदिर की वास्तुकला : मां वैष्णो मंदिर के निर्माण में वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा गया है। उड़ीसा प्रांत से आये कारीगर आरके परेरा द्वारा मंदिर का निर्माण किया गया है। एक बीघा में निर्मित मंदिर तीन मंजिला गुफा वाला है। गुफा का निर्माण प्रवेश द्वार से लेकर 725 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। वास्तुकला के हिसाब से मंदिर के बीचोबीच मां वैष्णो देवी हैं। प्रथम तल पर माता महालक्ष्मी, द्वितीय तल पर माता नवदुर्ग स्थित हैं। इसके साथ ही भगवान शंकर, वीर हनुमान, भैरो बाबा, माता गायत्री व ब्रह्मा जी स्थापित हैं।

क्या कहते हैं मन्दिर के पुजारी : मन्दिर के प्रधान पुजारी पंडित श्रीकांत तिवारी ने बताया कि डाला-बारी में स्थित मां वैष्णो शक्तिपीठ धाम में तो हर रोज दूरदराज से भक्त दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। यहां पर माता आदिशक्ति के नव रूपो की विशेष पूजा की जाती है।नवरात्रि समेत अन्य अवसरों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते जाते हैं और मन चाहीं मुराद मां उन सबकी पूरा करती है। दिनोंदिन भक्तों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। मनोकामना पूरा होने के लिए मंदिर के प्रागंण में नारियल बांधते हैं।

वहीं कृष्ण कुमार ने बताया कि वाराणसी शक्तिनगर हाइवे पर मंदिर होने के कारण झारखंड,छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश से लेकर तमाम जगहों से लोग आते है, और दर्शन पूजन करते है | प्रतिदिन हजारों की संख्या में दर्शनार्थी दर्शन पूजन करते है। दूर दराज से मंदिर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए मंदिर प्रागंण में प्रेक्षागृह व शादी विवाह के आयोजन के लिए अलग-अलग कमरों का निर्माण किया गया है।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *