Connect with us

लाइफ स्टाइल

शबनम से महामंडलेश्वर भवानी बनने की इनकी पूरी कहानी-समाज के हर शख्स को जरूर पढ़नी चाहिए

Published

on

कुंभ 2019 (Kumbh 2019) में 15 जनवरी से शुरू हुआ है और ये मेला 4 मार्च तक चलेगा। इस बार का कुंभ मेला कई मायने में खास है। यहां हर बार की तरह 13 नहीं बल्कि 14 अखाड़ों ने शिरकत की है। 14वें अखाड़े के रूप में किन्नर अखाड़े को शामिल हुआ है। इस अखाड़े की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मीकि हैं।

महामंडलेश्वर भवानी ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी जिंदगी काफी मुश्किल रही है। उनका परिवार बेहद गरीब था। पिता की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी जिससे पूरे परिवार का भरण-पोषण हो सके। उन्होंने बताया कि 17 नवंबर 1972 को दिल्ली के चाणक्यपुरी में जन्म हुआ।

सबकुछ सामान्य था पर 13 साल की उम्र में पता चला था कि मैं अलग हूं। समझ आया कि किन्नर हूं। जब उनके साथ उनके रिश्तेदार ने ही दरिंगदी की थी। पिता स्व. चंदरपाल सेना में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी थे। उन्होंने 14 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। उनके कुल 8 भाई-बहन हैं। भवानी ने 2011 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया था।

कर चुकी हैं हज यात्रा : मां भवानी इस्लाम धर्म अपनाने के बाद साल 2012 में हज यात्रा भी कर चुकी हैं। हालांकि इसके 5 साल बाद उन्होंने दोबारा हिंदू धर्म अपना लिया। वे साल 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में धर्मगुरु बनी थीं। उन्हें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने साल 2017 में महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी।

इंटरव्यू में किए थे ये खुलासे, इस्लाम फिर दोबारा अपनाया हिंदू धर्म : मां भवानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें पता चला कि वे किन्नर हैं। तब उन्हें किन्नर और सामान्य स्त्री-पुरुष के बारे में कुछ पता नहीं था। समाज के लोग अन्य बच्चों की तरह पेश नहीं आते थे। ये बात उन्हें हमेशा परेशान करती थी। उन्होंने कहा कि उनकी पहली गुरु हाजी नूरी ने उन्हें इस्लाम अपनाने को कहा था। भवानी कहती हैं, ‘मैं इस्लाम अपनाकर शबनम बन गई। एक मुस्लिम के रूप में इस्लाम के हर सिद्धांत का पालन किया। रमजान में रोजे रखे। साल 2012 में हज का भी मौका मिला। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब तीसरे जेंडर की पहचान को मान्यता दी तो सोचा कि ‘जब मुझे वैसे ही जीने का मौका मिला रहा है जिस रूप में मैंने जन्म लिया था तो साल 2014 में मैंने वापस अपना नाम और पहचान स्वीकार कर ली।

किन्नर अखाड़े की संस्थापक सदस्य बनीं : मां भवानी ने इसके बाद साल 2015 में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के साथ मिलकर किन्नर अखाड़े की स्थापना की। साल 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में धर्मगुरु बनी थीं। उन्हें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने साल 2017 में महामंडलेश्वर की उपाधि दी। वे बताती हैं कि वे बचपन से मां महाकाली की उपासक हैं। इस्लाम स्वीकारने के बावजूद उनके घर में काली की पूजा होती थी।

वे उपासना में घंटों समय बिताती हैं। प्रयागराज कुंभ में भी मां भवानी किन्नर अखाड़े की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वे अखाड़े में हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखती हैं। श्रद्धालुओं और अखाड़े के सदस्यों के लिए बनने वाले खाने की व्यवस्था खुद चेक करती हैं। मां भवानी प्रयागराज कुंभ में किन्नर अखाड़े की पेशवाई में भी बग्घी पर बैठी नजर आई थीं।

सोशल मीडिया पर उनके नाम से पेज भी बना हुआ है। जिसमें उनकी कई तस्वीरें अपलोड की गई हैं।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *