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सिर्फ़ 22 साल की उम्र में गाँव का लड़का बना शहरी महिलाओं की उम्मीद का किरण..

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साल 2012 में आई फिल्म विकी डोनर तो आपने देखी ही होगी। फिल्म में विकी नाम के एक पंजाबी लड़के का किरदार निभाने वाले आयुष्मान खुराना ने स्पर्म डोनर की जिंदगी के बारे में दिखाया था। लेकिन आपको अगर लगता है कि ऐसा केवल फिल्मों में होता है तो आप गलत हैं क्योंकि ऐसा रियल लाइफ में भी होता है। हम आपको एख रियल लाइउ स्पर्म डोनर के बारे में बताने जा रहे हैं , जिसकी उम्र केवल 22 साल है।

बता दें दिल्ली के रहने वाले ये युवक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। युवक ने बताया कि वह एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखता है, जहां शादी से पहले किसी लड़की के साथ संबंध स्थापित करना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में लड़कों के पास मास्टरबेट का इकलौता विकल्प बचता है। युवक ने बताया कि एक बार वह अखबार पढ़ रहा था, जिसमें उसने स्पर्म डोनेशन की रिपोर्ट पढ़ी। युवक ने कहा कि इससे पहले उसने सिर्फ ब्लड डोनेशन के बारे में ही सुना था,

कभी स्पर्म डोनेशन के बारे में नहीं पढ़ा था। इस रिपोर्ट में उसे काफी दिलचस्पी हुई, जिसके बाद उसने स्पर्म डोनेशन सेंटर्स के बारे में जांच पड़ताल की तो मालूम चला कि उसके घर के पास ही एक सेंटर है। जिसके बाद वह सेंटर जा पहुंचा और स्पर्म डोनेशन के बारे में जानकारी इकट्ठा की। युवक शरीर से तंदरुस्स था, लेकिन स्पर्म डोनेट करने के लिए अंदर से भी शारीरिक मज़बूती होनी चाहिए। सेंटर में मौजूद डॉक्टरों ने युवक के कुछ टेस्ट किए और उसे अगले दिन बुलाया।

युवक ने बताया कि वह अगले दिन डोनेशन के लिए सेंटर पहुंचा। एक बार डोनेट करने पर उसे 400 रुपये दिए गए। छात्र ने बताया कि अब ये सिलसिला शुरू हो चुका था। उसने बताया कि डोनेशन करने से उसे एक तसल्ली मिलती थी कि उसकी मदद से एक महिला मां बनेगी। छात्र ने बताया कि इस काम में कोई बुराई नहीं है, लेकिन हमारे समाज के कुछ लोग ऐसे भी हैं जो शायद कभी स्पर्म डोनेशन की महत्ता को नहीं समझ पाएंगे। युवक ने बताया कि स्पर्म डोनेट करना कोई अपराध नहीं है, लेकिन फिर भी इसके बारे में लोगों से बताना भी काफी मुश्किलों भरा अनुभव हो सकता है।

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