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धार्मिक

हिमालय में यहां रहते हैं दिव्य स्त्री और पुरुष…दोनों की उम्र 6500 साल-श्री कृष्ण से कर चुके हैं मुलाकात

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 क्या रहस्य है इस जगह का? कहते है की यह सिद्ध क्षेत्र किसी सिद्ध शक्ति के नियंत्रण क्षेत्र में है और उनकी ईच्छा के बिना कोई भी वहाँ न जा सकता है और ना ही वहां से वापस आ सकता है। वंहा वे ही लोग जाने में सफल हो पाते है जिनकी चेतना का स्तर उच्च हो। हम बात कर रहे है ज्ञानगंज की।

माना जाता है, की ज्ञानगंज के आस पास कही एक ऐसा स्थान है जहाँ गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव शुन्य होता है। धरती पर शुन्य भार वाली जगह जहाँ भी पाई जाती है। वहां बहूत सारी रहस्यमय गातिविधियां एवं हलचल वैज्ञानिको द्वारा नोटिस की गयी है। कहते है धरती पर चेतना के तीन आयाम पाऐ जाते है और ऐसी जगह पर चेतना का चौथा आयाम भी खुल जाता है। जब व्यक्ति ऐसी जगह पर पहूंचता है तो अपने वर्तमान अस्तित्व को खो कर अन्य आयाम में प्रवेश कर जाता है। इस जगह के बारे में कई विद्वानों का यह भी मानना है की इस स्थान का सम्बन्ध दुसरी दुनिया या दुसरे लोको से भी जुडा हुआ है।

और किन प्राचीन ग्रंथो में यंहा का उल्लेख है? इस घाटी के बारे में आप को अधिक जानकारी एक प्राचीन ग्रन्थ ‘काल विज्ञान’ जो की तिब्बत के तवांग मठ के एक पुस्तकालय में आज भी मौजूद है में मिल सकती है। इस किताब में वर्णन है की हम जिस संसार में रहते है वह तीन आयामी संसार है जहां हर वस्तू देश, समय, और नियती से बंधी हुई है। जब व्यक्ती ऐसे क्षेत्रो में प्रवेश कर जाता है जहां समय नगण्य है, तब वह समय के बन्धनों से परे चला जाता है। सरल शब्दों में हमारे यंहा के सेकड़ो वर्ष और वहां का एक पल बराबर होंगे। इस जगह का उल्लेख रामायण, महाभारत आदि ग्रंथो में भी मिलता है।

यानि कोई व्यक्ति ऐसे स्थानों पर यदि कुछ वर्ष बिता कर वापस आता है तो संभव है की उसके वापस आने तक हमारे संसार की सदियों गुजर चुकी हो। शंगरीला घाटी पर विचार, मन, और प्राण की शक्ति बहूत ही उच्च स्तर तक पहुँच जाती है।

जो लोग इस घाटी से परिचित है वो बताते है कि आज भी वहाँ ऐसे योगी और सिद्ध पुरुष मौजूद है जिनकी उम्र हजारो वर्ष है। एवं वे अपने दृश्य या अदृश्य रूप में यहां निवास करते हैं। यहां के मठ के गुरु और माता की उम्र 6500 साल से भी ज्यादा है। कहा जाता है कि वो दोनों श्रीकृष्ण से भी मुलाकात कर चुके हैं। लोगों का दावा है कि प्रसिद्ध योगी श्यामाचरण लाहिड़ी के गुरु जिन्होंने शंकराचार्य को भी दीक्षा दि थी वे आज भी इन घाटियों (ज्ञानगंज, ) के आश्रमों में निवास कर रहे है एवं समय समय पर आकाश मार्ग से आकर अपने शिष्यों को निर्देश भी देते है।

योगी लोग कैसे वर्णन करते है इस चमत्कारीक जगह का? ज्ञानगंज पर एक योगी अपने अनुभवों का बयान करते हुऐ कहते है की वहां न तो सूरज की रौशनी है न ही चंद्रमा का प्रकाश वो सारी दुनिया दुधिया रंग के अनोखे प्रकाश में डूबी हुई लगती है। यह प्रकाश कहाँ से आता है यह किसी को पता नहीं। एक दिव्य अध्यात्मिक अनुभूति यहाँ के साधको को होती है।

अनेको सैनिको, खोजकर्ताओ, पर्वतारोहियों, वैज्ञानिको आदि ने समय समय पर इस स्थान के बारे में अपने रोमांचकारी अनुभवों का विस्तार से वर्णन किया है। कई तरह के किस्से कहानियाँ भी इस जगह को लेकर प्रचलित है। लेकिन कभी भी यहाँ के रहस्यों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।

इस जगह के बारे में ख़ास बाते : केवल सिद्ध योगी ही इस जगह पर पहुँच सकता है। नवीनतम उपग्रहों आदि की मदद से भी इस जगह को ट्रैक कर पाना संभव नहीं है। ज्ञानगंज (Gyanganj) में म्रत्यु नहीं आ सकती। ज्ञानगंज (Gyanganj) दिशाओ के बोध से परे है, यहाँ पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण का अनुमान नहीं किया जा सकता है।

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