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दिल्ली में पटाखे पूरी तरह बैन होने से कारोबारी बेचैन, 500 करोड़ से ज्यादा के कारोबार का होगा क्या?

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दिल्ली में पटाखे पूरी तरह बैन होने से कारोबारी बेचैन, 500 करोड़ से ज्यादा के कारोबार का होगा क्या?

दिल्ली में दिवाली से ठीक पहले दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली में पटाखों को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है. यहां तक की ग्रीन क्रेकर्स भी नहीं बिकेंगे. दिल्ली पटाखों का एक बहुत बड़ा बाजार है. दिल्ली में पटाखों का कारोबार 500 करोड़ से ज्यादा का है. जिसका बड़ा हिस्सा ग्रीन क्रेकर्स ही आता है. ऐसे में इस फैसले के बाद उन कारोबारियों का क्या होगा जिन्होंने ग्रीन क्रेकर्स पहले ही तैयार कर रखे थे. आइए जानते हैं कि इस फैसले को दिल्ली के कारोबारी कैसे देखते हैं.

Supreme Court bans sale of fire crackers in Delhi, NCR - YouTube

दिल्ली में दिवाली से ठीक पहले दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली में पटाखों को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है. यहां तक की ग्रीन क्रेकर्स भी नहीं बिकेंगे. दिल्ली पटाखों का एक बहुत बड़ा बाजार है. दिल्ली में पटाखों का कारोबार 500 करोड़ से ज्यादा का है. जिसका बड़ा हिस्सा ग्रीन क्रेकर्स ही आता है. ऐसे में इस फैसले के बाद उन कारोबारियों का क्या होगा जिन्होंने ग्रीन क्रेकर्स पहले ही तैयार कर रखे थे. आइए जानते हैं कि इस फैसले को दिल्ली के कारोबारी कैसे देखते हैं.

 

क्या होता है ग्रीन क्रेकर्स

 

ग्रीन क्रेकर्स भी एक तरह का पटाखा ही होता है. ग्रीन क्रैकर्स से 30% पार्टिकुलेट मैटर निकलता है. और इनमें बेरियम नाइट्रेट की जगह पोटेशियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर ज्यादा होता है. ग्रीन का मतलब एन्वॉयरनमेंट फ्रेंडली है. मतलब जिसका पर्यावरण पर बुरा असर न पड़े. लेकिन ऐसा नहीं है कि ग्रीन क्रैकर्स का पर्यावरण पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. इनका भी पर्यावरण पर बुरा ही असर होता है बस दूसरे पटाखों के मुकाबले थोड़ा कम. इसी सोच के साथ दिल्ली में पटाखों को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.

 

500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक दिल्ली में पटाखों का कारोबार 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का होता है. दिल्ली सरकार ने पटाखों के बैन का स्वागत है लेकिन बात ग्रीन पटाखे की है तो कारोबारियों के पास भारी मात्रा में स्टॉक है. ऐसे में इन्हें रद्दी की टोकरी में डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता.

40 फीसदी से ज्यादा है ग्रीन क्रेकर्स की हिस्सेदारी

 

दरअसल नॉ़र्मल पटाखों में करीब 60 फीसदी बोरियम सल्फेट की मात्रा होती है. जो पहले से ही पूरी तरह बैन है. अब ग्रीन पटाखे भी बैन होने से कोरोबारी सकते में आ गए हैं. दिल्ली के सदर बाजार में पटाखा कारोबारी सनी खुराना कहते है कि सरकार को यह फैसला पहले करना चाहिए था. ऐसे अचानक आए फैसले से हमारा सारा माल बरबाद हो जाएगा. पहले ही हम कोविड की मार झेल रहे थे. दिवाली से उम्मीद थी कि कारोबार कुछ बढ़ेगा.

 

क्या होता है ग्रीन क्रेकर्स

Green Crackers are costly and there is no demand, claim sellers

ग्रीन क्रेकर्स भी एक तरह का पटाखा ही होता है. ग्रीन क्रैकर्स से 30% पार्टिकुलेट मैटर निकलता है. और इनमें बेरियम नाइट्रेट की जगह पोटेशियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर ज्यादा होता है. ग्रीन का मतलब एन्वॉयरनमेंट फ्रेंडली है. मतलब जिसका पर्यावरण पर बुरा असर न पड़े. लेकिन ऐसा नहीं है कि ग्रीन क्रैकर्स का पर्यावरण पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. इनका भी पर्यावरण पर बुरा ही असर होता है बस दूसरे पटाखों के मुकाबले थोड़ा कम. इसी सोच के साथ दिल्ली में पटाखों को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.

 

500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक दिल्ली में पटाखों का कारोबार 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का होता है. दिल्ली सरकार ने पटाखों के बैन का स्वागत है लेकिन बात ग्रीन पटाखे की है तो कारोबारियों के पास भारी मात्रा में स्टॉक है. ऐसे में इन्हें रद्दी की टोकरी में डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता.

 

40 फीसदी से ज्यादा है ग्रीन क्रेकर्स की हिस्सेदारी

Nobody understands what green crackers are

 

दरअसल नॉ़र्मल पटाखों में करीब 60 फीसदी बोरियम सल्फेट की मात्रा होती है. जो पहले से ही पूरी तरह बैन है. अब ग्रीन पटाखे भी बैन होने से कोरोबारी सकते में आ गए हैं. दिल्ली के सदर बाजार में पटाखा कारोबारी सनी खुराना कहते है कि सरकार को यह फैसला पहले करना चाहिए था. ऐसे अचानक आए फैसले से हमारा सारा माल बरबाद हो जाएगा. पहले ही हम कोविड की मार झेल रहे थे. दिवाली से उम्मीद थी कि कारोबार कुछ बढ़ेगा.

SOURCE ARTICLE : TV 9 BHARAT VARSH

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