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कोरोना वायरस

मौसमी सर्दी जितना सामान्य कैसे हो जाएगा कोरोना वायरस संक्रमण, एक्सपर्ट्स ने गिनवाईं वजहें

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कोरोना महामारी, जो कि इस वक्त पूरी दुनिया में तबाही मचा रही है उसको लेकर एक राहत देने वाली बात कही गई है. बताया गया है कि आने वाले एक-दो सालों में कोविड-19 एक आम बीमारी मानों सर्दी-जुकाम जैसा हो सकता है. इस बात के सामने आने के बाद लोगों के मन में कई सवाल हैं. कि जानलेवा वायरस आने वाले वक्त में इतना कमजोर कैसे हो सकता है. अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे के तथ्य भी सामने रखे हैं.

हावर्ड यूनिवर्सिटी के टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मार्क लिप्सिच मानते हैं कि इम्यूनिटी, वैक्सीनेशन की वजह से आने वाले वक्त में अगर किसी को कोरोना होगा भी तो उतनी हानि नहीं पहुंचा पाएगा. अपनी बात को मजबूत करने के लिए सबसे पहली बात जो एक्सपर्ट्स कहते हैं वह यह कि पिछली महामारियों का भी ऐसे ही अंत हुआ था.

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मतलब लोगों की बॉडी खुद कोरोना के खिलाफ इम्यून सिस्टम को मजबूत कर लेगी. वैज्ञानिक मानते हैं कि चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान भी वायरस को कमजोर करने में मदद करेंगे.

पिछली महामारियों का भी ऐसा हुआ अंत

पिछली महामारियों के उदाहरण देखें तो 1918 फ्लू महामारी, 1952 H2N2 महामारी, 1968 H3N2 महामारी और 2009 की H1N1 महामारी सबके साथ ऐसा ही हुआ है. मतलब सब अंत में endemic बन गई. मतलब ये महामारियां बिना किसी बड़े स्तर के टीकाकरण के खुद ही खत्म हो गईं. इन महामारियों के खिलाफ मनुष्यों में हर्ड इम्यूनिटी डिवेलप नहीं हुई, बल्कि ये बीमारियां ही खुद खत्म हुईं.

अबतक के उदाहरण यहीं बताते हैं कि लोगों का इम्यून सिस्टम खुद को नए और जानलेवा बीमारी के हिसाब से ढाल लेता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि Sars-Cov2 के साथ भी ऐसा ही होगा.

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एमोरी विश्वविद्यालय की जेनी लवाइन, जो कि बायोलॉजी की रिसर्च फेलो हैं वे भी मानती हैं कि कोरोना होकर ठीक होने पर इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, साथ-साथ चल रहे टीकाकरण अभियान की मदद से आने वाले भविष्य में कोरोना सर्दी-जुकाम के बराबर की बीमारी होगी.

तो क्या कोरोना टीकाकरण बेमतलब है?

लेकिन इस बीच एक सवाल भी उठता है. कि अगर इम्यून सिस्टम को ही सब करना है तो फिर क्या टीकाकरण अभियान बेमतलब है? नहीं ऐसा नहीं है. वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर कोरोना सीजनल फ्लू भी बन गया तो अलग-अलग देशों पर इसका प्रभाव अलग-अलग होगा. मतलब जिन देशों में टीकाकरण रेट ज्यादा होगा वहां इसका प्रभाव कम होगा. वहीं कम टीकाकरण वाले इलाके ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.

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इस बीच गौर करने वाली एक बात और है. पिछली जिन महामारियों का जिक्र किया गया है वे इन्फ्लूएंजा वायरस की वजह से फैले थे, वहीं कोविड-19 कोरोना वायरस की वजह से फैला है. लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि इससे वायरस के अंत पर बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ने वाला है

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