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Oxygen Deaths: अस्पतालों ने भी स्वीकार किया, मौतें ऑक्सिजन की कमी से हुई थीं

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विशेष संवाददाता, नई दिल्ली बीते अप्रैल व मई में दिल्ली में ऑक्सिजन के लिए हाहाकार मचा हुआ था। अस्पताल ऑक्सिजन की किल्लत से इस कदर जूझ रहे थे कि उन्हें एसओएस जारी करना पड़ रहा था। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कई अस्पताल हार्ट कोर्ट तक पहुंच गए। लेकिन, संसद में दिए गए बयान जिसमें कहा गया कि से कोई मौत नहीं हुई, उस पर डॉक्टर भी हैरान हैं। बत्रा हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर एस सी एल गुप्ता ने बुधवार को अपने बयान में कहा कि उन दिनों को मैं कभी भूल नहीं सकता। मेरे पूरे मेडिकल जीवन में ऐसे दिन कभी नहीं देखे। मैंने अपने साथी डॉक्टर तक को खो दिया। हालत यह थी कि सुबह की चिंता के लिए रात भर सोते नहीं थे।

Covid-19: India outrage over 'no oxygen shortage death data' claim - BBC  News

बस यही चिंता रहती थी कि कोई बड़ी घटना न हो जाए। लेकिन एक मई को वह दुखद दिन आया और पूरे देश ने उसे देखा। हमने अपने सीनियर डॉक्टर, जो सालों से यहां काम कर रहे थे, उन्हें भी खो दिया। उस दौरान 12 लोगों की मौत हुई थी। इसलिए यह कहना कि ऑक्सिजन की कमी से मौत नहीं हुई, यह एकदम गलत है। उन्होंने आगे कहा कि सरकारी दिशा निर्देशों के अनुसार हमें कोविड और नॉन कोविड से होने वाली मौत की जानकारी देने को कहा गया था। कहीं भी ऑक्सिजन की वजह से हुई मौत के बारे में जिक्र नहीं होता था। उन्होंने कहा कि जो पूछा जाएगा, वही बताया जाएगा ना।
No deaths due to lack of oxygen reported by states/UTs during COVID-19  second wave: Centre
इस बारे में जयपुर गोल्डन असपताल के चेयरमैन डॉ. मनोज शर्मा ने अपने बयान में कहा कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान उनके अस्पताल में ऑक्सिजन की कमी की वजह से 20 से 21 मरीजों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि यह बात सब लोग जानते हैं कि कोविड में जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है तो उसे ऑक्सिजन की जरूरत होती है। मरीज को ऑक्सिजन सपोर्ट पर रखा जाता है। ऑक्सिजन की कमी की वजह से लंग्स काम करना बंद कर देते हैं और ऐसी स्थिति में मरीज की मौत हो जाती है।

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