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यूटिलिटी

SBI ग्राहकों को 28 फरवरी तक कराना है केवायसी, ऐसी नहीं करने पर खाते से नहीं कर सकेंगे पैसों का लेन-देन

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Dainik Bhaskar

Feb 26, 2020, 06:32 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों को 28 फरवरी तक केवायसी पूरी करने के लिए कहा है। अगर कोई ग्राहक केवायसी नहीं कराता हैं तो उसके बैंक खाते के ट्रांजेक्शन (लेन-देन) को रोक दिया जाएगा। आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने सभी बैंक अकाउंट के लिए केवाईसी को जरूरी बना दिया है।

केवायसी न कराने वालों को होगी परेशानी

  1. नहीं कर सकेंगे पैसों का लेन देन

    SBI ने कहा है कि कृपया नवीनतम केवायसी दस्तावेजों के साथ अपनी एसबीआई शाखा में जाकर संपर्क करें। केवायसी पूरी नहीं किए जाने की स्थिति में आपके खाते में भविष्य में किए जाने वाले लेन-देन पर रोक लगाई जा सकती है।

  2. मोबाइल वीडियो से घर बैठे करा सकते हैं केवायसी

    भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में केवायसी नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत आधार बेस्ड वीडियो कस्टमर आइडेंटिफिकेशन प्रॉसेस (V-CIP) को मंजूरी दी गई है। अब बैंक, एनबीएफसी और दूसरे लोन देने वाले संस्थान वीडियो बेस्ड आइडेंटिफिकेशन प्रोसेस का इस्तेमाल केवायसी के लिए कर सकेंगे। इससे अब लोगों को केवायसी के लिए बैंक या दूसरे संस्थानों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  3. कैसे होगी वीडियो केवायसी?

    • इस नई सुविधा के तहत दूरदराज के इलाकों में मौजूद फाइनैंशल इंस्टीट्यूशन के अधिकारी पैन या आधार कार्ड और कुछ सवालों के जरिए ग्राहक की पहचान कर सकेंगे।
    • वीडियो कॉल का विकल्प संबंधित बैंक या संस्था के डोमेन पर ही मिलेगा। ग्राहक थर्ड पार्टी सोर्स जैसे- गूगल डुओ या व्हाट्सएप कॉल या अन्य किसी माध्यम से वीडियो कॉल नहीं कर सकेंगे।
    • आधार बेस्ड वीडियो कस्टमर आइडेंटिफिकेशन प्रॉसेस के तहत वित्तीय संस्थाओं के अधिकारी पैन या आधार कार्ड पर आधारित कुछ सवालों से ग्राहक की पहचान की पुष्टि करेंगे। इसके साथ ही एजेंट को जियो-कॉर्डिनेट्स के तहत इसकी पुष्टि भी करनी होगी कि ग्राहक देश में ही है।
  4. क्या है केवायसी?

    केवायसी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संचालित एक पहचान प्रक्रिया है जिसकी मदद से बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं अपने ग्राहक के बारे में अच्छे से जान पाती हैं। केवायसी यानि “नो योर कस्‍टमर” यानि अपने ग्राहक को जानिये। बैंक तथा वित्तीय कम्पनियां इसके लिए फॉर्म को भरवा कर इसके साथ कुछ पहचान के प्रमाण भी लेती हैं।

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